रक्षाबंधन, हरियाली तीज, सावन सोमवार व्रत और भद्राकाल 2024: शुभ मुहूर्त व तिथि

रक्षाबंधन, हरियाली तीज, सावन सोमवार व्रत और भद्राकाल 2024: शुभ मुहूर्त व तिथि

जय श्री राम प्रिय पाठकों! कैसे है आप लोग

आशा करते हैं कि आप ठीक होंगे। 

रक्षाबंधन, हरियाली तीज, सावन सोमवार व्रत और भद्राकाल 2024: शुभ मुहूर्त व तिथि


प्रिय पाठकों ! आज की इस पोस्ट मे हम जानेंगे की रक्षाबंधन, हरियाली तीज, सावन सोमवार व्रत और भद्राकाल 2024 मे कब है?इसके अलावा जानेंगे की इन त्योहारों के शुभ मुहूर्त व तिथि क्या है?

मित्रों! सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है. सावन महीने के सभी सोमवार और मंगलवार तो बेहद महत्वपूर्ण होते ही हैं. इसके अलावा इस महीने में कई अन्य महत्वपर्ण व्रत-त्योहार भी पड़ते हैं।

कहा जाता है की श्रावण महीने में किये गए जलाभिषेक और पूजा पाठ से प्रसन्न होकर महादेव आपकी हर इच्छा को पूरा करते। तो चलिए बिना देरी किए जानते है की साल 2024 में सावन कब से शुरू है। 

श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रम् /भगवान् चंद्रशेखर (चंद्राष्टकम   स्तोत्र) 

सावन महीना प्रारंभ 

इस बार सावन में कितने सोमवार व्रत पड़ेंगे और रक्षाबंधन व हरियाली तीज कब मनाई जाएगी। 

राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और बिहार के लिए- 
सावन का महीना प्रारम्भ होगा 22 जुलाई 2024 दिन सोमवार से। 

सावन का महीना समाप्त होगा 19 अगस्त 2024 दिन सोमवार को ।

सावन सोमवार व्रत

इन राज्यों के लिए कुल 5 सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे

• सावन का पहला सोमवार :- 22 जुलाई

• सावन का दूसरा सोमवार :- 29 जुलाई

• सावन का तीसरा सोमवार :- 05 अगस्त

• सावन का चौथा सोमवार :- 12 अगस्त

• सावन का पांचवा सोमवार :- 19 अगस्त

पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए-

सावन का महीना प्रारम्भ होगा 05 अगस्त 2024 दिन सोमवार 

सावन का महीना समाप्त 03 सितम्बर 2024 दिन मंगलवार

सावन सोमवार व्रत

इन राज्यों के लिए कुल 5 सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे

• सावन का पहला सोमवार :- 05 अगस्त

• सावन का दूसरा सोमवार :- 12 अगस्त

• सावन का तीसरा सोमवार :- 19 अगस्त

• सावन का चौथा सोमवार :- 26 अगस्त

सावन का पांचवा सोमवार :- 02 सितम्बर

रक्षाबंधन 2024

• रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

• साल 2024 में रक्षाबंधन 19 अगस्त दिन सोमवार को है।

• पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त सुबह 03:04 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 11:55 मिनट पर समाप्त होगी.

राखी बांधने का शुभ समय 

• राखी बांधने का समय दोपहर 01:30 मिनट से रात 09:07 मिनट तक का रहेगा.

• रक्षा बन्धन के दिन भद्रा समाप्ति का समय दोपहर 01:30 मिनट

हरियाली तीज 2024

• हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है

• साल 2024 में हरियाली तीज 7 अगस्त दिन बुधवार को मनाई जाएगी.

• तृतीया तिथि 6 अगस्त की शाम 07:52 मिनट से लेकर 7 अगस्त 10:11 मिनट तक रहेगी।

भद्रा काल का समय 

19 अगस्त 2024 सोमवार भद्रा मुख सुबह 10:53 से दोपहर 12:37 तक भद्रा पूंछ सुबह 9:51 से सुबह 10:53  तक और भद्रा काल समाप्त दोपहर 1:30 तक

कुम्भ मेला (सम्पूर्ण जानकारी) 

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 

मित्रों! वैसे तो 19 अगस्त 2024 को राखी बांधने का समय दोपहर 01:30 मिनट से रात 09:07 मिनट तक का है। इतने समय मे आप कभी भी राखी बाँध सकते हैं।

लेकिन कुछ लोगों के मन मे शुभ मुहूर्त की शंका रहती हैं की आखिर इस बीच का शुभ समय क्या है? यानी के दोपहर 01:30 मिनट से लेकर रात 09:07 मिनट तक का बिलकुल सही मुहूर्त क्या है?

तो उनके लिए हम बता दे कि इस बीच राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है 

पहला शुभ मुहूर्त समय- दोपहर 1:45 मिनट से लेकर शाम 4:20 मिनट तक।

दूसरा शुभ मुहूर्त समय- शाम 6 बजकर 56 मिनट से लेकर रात 9 बजकर  7 मिनट तक।

तो प्रिय पाठकों, आशा करते हैं कि आपको पोस्ट पसंद आई होगी। ऐसी ही अन्य त्योहारों की जानकारीयों के साथ विश्वज्ञान मे अगली पोस्ट के साथ फिर से मुलाकात होगी, तब तक के लिए आप हँसते रहें, मुस्कराते रहें और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहें। 

धन्यवाद 

आपको रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 

Faqs 

2024 मे सावन कब है?

22 जुलाई और 5 अगस्त 

सोमवार का व्रत कब से शुरू करें 2024?

22 जुलाई और 5 अगस्त 

भादों की तीज कब है 2024?

हरियाली तीज 7 अगस्त दिन बुधवार सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को है। 

सावन का जल कब चढ़ेगा 2024?

शिवरात्रि 2 अगस्त और इसके अलावा सावन के सोमवार और सावन के प्रदोष व्रत के दिन सावन का जल चढ़ाया जा सकता है। 

2024 की कावड़ यात्रा कब है?

22 जुलाई 2024

कावड़ियों का जल कौन सी तारीख में चढ़ेगा?

2 अगस्त शिवरात्री के दिन 

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र क्या है?

पुरुष लोग ॐ नमः शिवाय का मंत्र और स्त्रियाँ शिवाय नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए जल चढ़ा सकते हैं।

 जल कब चढ़ेगा सावन? 

सावन में हर सोमवार को जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

शिवलिंग पर जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए? 

शिवलिंग पर जल चढ़ाने में कोई निषेध नहीं है, लेकिन हमेशा ध्यानपूर्वक और श्रद्धा से जल चढ़ाना चाहिए।

जल अभिषेक कब का है? 

जल अभिषेक सावन के महीनों में, विशेषकर सोमवार को किया जाता है।

शिवलिंग योनि का मुख किस दिशा में होना चाहिए? 

शिवलिंग की योनि का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

क्या महिलाएं शिव अभिषेक कर सकती हैं? 

हाँ, महिलाएं शिव अभिषेक कर सकती हैं। इसमें कोई निषेध नहीं है।

शिवलिंग का अभिषेक कब करना चाहिए? 

शिवलिंग का अभिषेक प्रातःकाल और रात्रि काल में करना सबसे शुभ माना जाता है।

शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? 

शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाना चाहिए।

शिवलिंग पर लौंग कैसे चढ़ाएं? 

शिवलिंग पर लौंग चढ़ाने से पहले उसे गंगाजल से धोकर, मंत्र उच्चारण करते हुए चढ़ाएं।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है? 

शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, और धतूरा चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है।

शिवलिंग पर चावल के कितने दाने चढ़ाने चाहिए? 

शिवलिंग पर 21, 51 या 108 चावल के दाने चढ़ाना शुभ माना जाता है।

शिवलिंग का जल पीने से क्या होता है? 

शिवलिंग का अभिषेक किया हुआ जल पवित्र माना जाता है और इसे पीने से स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

शिवलिंग पर शहद लगाकर बेलपत्र चढ़ाने से क्या होता है? 

शहद लगाकर बेलपत्र चढ़ाने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर गुड़ चढ़ाने से क्या होता है? 

गुड़ चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है। 

शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाएं, बैठकर या खड़े होकर? 

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय बैठकर जल चढ़ाना अधिक उचित माना जाता है।

शिवलिंग पर मूंग की दाल चढ़ाने से क्या होता है? 

मूंग की दाल चढ़ाने से शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर चने की दाल क्यों चढ़ाई जाती है? 

चने की दाल चढ़ाने से स्वास्थ्य लाभ और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर मूंग के कितने दाने चढ़ाने चाहिए? 

शिवलिंग पर 21 मूंग के दाने चढ़ाना शुभ होता है।

शिवलिंग पर चावल कब चढ़ाएं? 

शिवलिंग पर चावल किसी भी पूजन के समय चढ़ाए जा सकते हैं, विशेषकर सोमवार को।

धन की प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए? 

धन की प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर गन्ने का रस, शहद, गुड़, और धतूरा चढ़ाना चाहिए।

शिवलिंग पर काला तिल कैसे चढ़ाएं? 

काले तिल चढ़ाने से पहले उन्हें गंगाजल से शुद्ध कर लें और फिर मंत्रों के साथ चढ़ाएं। या फिर अभिषेक किए जाने वाले जल मे गंगाजल,काले तिल और इत्र मिलाकर भी काले तिल चढ़ाये जा सकते हैं। 

शिवलिंग पर तिलक कैसे लगाएं? 

शिवलिंग पर तिलक अंगूठे या अनामिका उंगली से लगाना चाहिए।

शिवलिंग पर कौन सा सिंदूर लगाना चाहिए? 

शिवलिंग पर हल्दी और चंदन का मिश्रण या कुमकुम का सिंदूर,भस्म लगाना चाहिए।

शिवलिंग पर पीला चंदन चढ़ा सकते हैं क्या? 

हाँ, शिवलिंग पर पीला चंदन चढ़ाया जा सकता है।

रोज कौन सा तिलक लगाना चाहिए? 

रोज चंदन, कुमकुम या हल्दी का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।

तिलक लगाते समय क्या बोलना चाहिए? 

तिलक लगाते समय "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ गण गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें।

धन प्राप्ति के लिए कौन सा तिलक लगाना चाहिए? 

धन प्राप्ति के लिए केसर और चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।

भद्रा को ब्रह्मा जी ने श्राप क्यों दिया था?

ब्रह्मा जी ने भद्रा को श्राप इसलिए दिया गया था क्योंकि उसने अपनी हठ और जिद से यज्ञ को खराब करने की कोशिश की थी। उसके इस गलत व्यवहार से क्रोधित होकर ब्रह्मा जी ने उसे श्राप दिया कि वह हर जगह अशुभ मानी जाएगी।

भद्र काल में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

भद्र काल को अशुभ समय माना जाता है। इस काल मे राखी बांधना ही नही बल्कि अन्य कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। ऐसा करने से कार्य का शुभ फल नहीं मिलता और समस्या उत्पन्न हो सकती है।

भद्र काल अशुभ क्यों है?

भद्र काल को अशुभ इसलिए माना जाता है क्योंकि यह समय भद्रा देवी के प्रभाव में होता है, जिन्हें श्राप मिला था। इस समय में किए गए कार्यों का नकारात्मक परिणाम हो सकता है।

भद्रा देवी कौन थी?

भद्रा देवी सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन थीं। वह बहुत ही तीव्र और उग्र स्वभाव की थीं, जिसकी वजह से उन्हें कई समस्याएं उत्पन्न होती थीं।

क्या पीरियड्स पर राखी बांध सकते हैं?

हाँ, पीरियड्स में राखी बांध सकते हैं। यह एक व्यक्तिगत और धार्मिक मान्यता का मामला है। कई लोग इसे मानते हैं कि इसमें कोई समस्या नहीं है।

भद्रा कितने घंटे की होती है?

भद्रा लगभग 12 घंटे तक रहती है। यह हर दिन की पंचांग स्थिति के अनुसार बदलती रहती है।

भद्रा शनि की बहन को किसने मारा?

भद्रा को किसी ने मारा नहीं था। वह श्रापित थीं और उनकी मृत्यु का कोई उल्लेख नहीं मिलता। श्राप के कारण उनका समय अशुभ माना जाता है।

क्या सावन का महीना हर प्रदेशों के लिए अलग अलग शुरु होता है?

हाँ, विभिन्न चंद्र कैलेंडर के उपयोग के कारण सावन का महीना कुछ प्रदेशों के लिए अलग अलग शुरु होता है। 

जैसे-राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और बिहार के लिए- सावन का महीना प्रारम्भ होगा 22 जुलाई 2024 दिन सोमवार से। 

तो वहीँ पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए-सावन का महीना प्रारम्भ होगा 05 अगस्त 2024 दिन सोमवार 


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