गीता उपदेश के समय क्या समय रुक गया था? | क्या धरती घूमना बंद हो गई थी? (शास्त्रीय सत्य)

VISHVA GYAAN

गीता उपदेश के समय क्या समय रुक गया था? | क्या धरती घूमना बंद हो गई थी? (शास्त्रीय सत्य)


नहीं, महाभारत या भगवद्गीता में कहीं यह उल्लेख नहीं है कि गीता उपदेश के समय भौतिक रूप से समय रुक गया था या धरती घूमना बंद हो गई थी। यह धारणा आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी है, जहाँ अर्जुन की चेतना शांत हो गई थी, न कि समय स्थिर हुआ था।


जय श्री कृष्ण 🙏प्रिय पाठकों कैसे है आप लोग आशा करते हैं श्री कृष्ण की कृपा से आप स्वस्थ,प्रसन्नचित और परिपूर्ण होंगे। 


मित्रों!

महाभारत का युद्ध केवल अस्त्र-शस्त्रों का संग्राम नहीं था, बल्कि यह मानव मन, धर्म और कर्तव्य का भी युद्ध था।

कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब अर्जुन ने अपने ही सगे-संबंधियों को युद्ध के लिए खड़ा देखा, तो उसका मन टूट गया। उसी क्षण श्रीकृष्ण ने उसे भगवद्गीता का अमर ज्ञान दिया।


लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक प्रश्न उठता है -

क्या गीता उपदेश के समय समय रुक गया था?

क्या धरती घूमना बंद हो गई थी?


आइए, इस प्रश्न को शास्त्र, तर्क और आध्यात्मिक दृष्टि से सरल भाषा में समझते हैं।


कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले अर्जुन जब मोह और भय में डूब गए थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का ज्ञान दिया। इस उपदेश को लेकर यह प्रश्न उठता है कि क्या उस समय समय रुक गया था।


श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश देते हुए
यह चित्र श्रीकृष्ण और अर्जुन के गीता उपदेश के प्रसंग को दर्शाता है।


क्या महाभारत में लिखा है कि समय रुक गया था?

सीधा और स्पष्ट उत्तर है - नहीं।

महाभारत में

भगवद्गीता में

न किसी प्रमाणिक शास्त्र मे यह लिखा है कि गीता के उपदेश के समय-

  •  धरती घूमना बंद हो गई
  •  सूर्य स्थिर हो गया
  •  ब्रह्मांड रुक गया

ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता।

गीता का उपदेश युद्ध शुरू होने से ठीक पहले हुआ था, और उसके बाद युद्ध पूरी गति से आगे बढ़ा।


फिर यह धारणा कैसे बनी कि समय रुक गया था?

यह धारणा आध्यात्मिक अनुभव को भौतिक घटना समझ लेने से बनी।

जब कोई व्यक्ति:

  • गहरे ध्यान में चला जाए
  • अत्यंत शांत अवस्था में पहुंच जाए
  • भीतर से पूरी तरह स्थिर हो जाए
  • तो उसे लगता है कि समय थम गया है।

असल में समय नहीं रुकता,

मन की चंचलता रुक जाती है।


अर्जुन के साथ वास्तव में क्या हुआ था?

अर्जुन उस समय-

  • भय से भरा हुआ था
  • मोह में डूबा हुआ था
  • कर्तव्य को लेकर भ्रमित था

श्रीकृष्ण ने जब उसे गीता का ज्ञान दिया, तब:

  • अर्जुन की चेतना ऊँचे स्तर पर पहुँची
  • उसका डर शांत हुआ
  • उसका मन स्थिर हुआ

यह मानसिक और आध्यात्मिक परिवर्तन था, न कि भौतिक समय का रुकना।


गीता में समय को लेकर श्रीकृष्ण क्या कहते हैं?

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं:

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत् प्रवृद्धः”

(अध्याय 11)

अर्थात् -

मैं स्वयं काल हूँ।


जो स्वयं काल है, वह काल को रोकने का नाटक क्यों करेगा?

श्रीकृष्ण का उद्देश्य समय रोकना नहीं,

बल्कि अर्जुन को समय के भीतर सही कर्म सिखाना था।


आध्यात्मिक दृष्टि से “समय रुकना” क्या होता है?

आध्यात्मिक भाषा में इसे कहते हैं:

  • चेतना का विस्तार
  • ध्यान की अवस्था
  • अहंकार का शांत होना

जब मन पूरी तरह वर्तमान में होता है,

तो भूत-भविष्य का बोध मिट जाता है।


इसी अनुभव को लोग कहते हैं कि -

समय रुक गया। लेकिन यह अनुभव है, घटना नहीं।


क्या इतने कम समय में पूरी गीता कही जा सकती थी?

हाँ, बिल्कुल।

गीता में कुल 700 श्लोक हैं

संस्कृत श्लोक संक्षिप्त और गूढ़ होते हैं

यह संवाद युद्ध आरंभ से पहले हुआ

और याद रखें -

श्रीकृष्ण कोई सामान्य वक्ता नहीं थे,

वे योगेश्वर थे। 

उनके लिए इतने कम समय मे ज्ञान देना असंभव नहीं था। 


भ्रम और कथा में अंतर समझना क्यों ज़रूरी है?

जब हम कहते हैं कि:

धरती रुक गई

समय थम गया

तो नई पीढ़ी इसे अंधविश्वास समझने लगती है। भ्रम में पड़ जाती हैं। 


लेकिन जब हम कहते हैं:

मन शांत हुआ

चेतना बदली

दृष्टि स्पष्ट हुई

तो गीता का ज्ञान आज के जीवन से जुड़ता है।


आज के जीवन में इसका क्या संदेश है?

आज भी जब:

हम तनाव में होते हैं

निर्णय नहीं ले पाते

जीवन उलझा लगता है


समाधान 

तो समाधान है - मन को स्थिर करना

कर्तव्य को समझना

फल की चिंता छो़ड़ देना

यही गीता का संदेश है।


निष्कर्ष (Conclusion)

गीता उपदेश के समय:

  • समय नहीं रुका था
  • धरती घूमती रही
  • युद्ध अपनी जगह था
  • पर जो रुका था, वह था -
  • अर्जुन का भय, मोह और भ्रम।
  • और यही गीता का चमत्कार है।


और पढ़े- महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने अठारह दिनों तक मूंगफली क्यों खाई?

FAQs (People Also Ask के लिए)


Q1. क्या गीता के समय धरती घूमना बंद हो गई थी?

नहीं, ऐसा कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है।


Q2. फिर समय रुकने की बात क्यों कही जाती है?

यह आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है, भौतिक घटना नहीं।


Q3. क्या श्रीकृष्ण समय रोक सकते थे?

श्रीकृष्ण काल के स्वामी थे, लेकिन उन्होंने समय रोकने की बजाय ज्ञान दिया।


Q4. गीता का असली संदेश क्या है?

कर्तव्य, विवेक और निष्काम कर्म।


प्रिय पाठकों, आशा करते हैं कि पोस्ट आपको पसंद आई होगी। अपनी राय हमें कमेंट में अवश्य बताएं! ऐसी ही रोचक जानकारियों के साथ विश्वज्ञान मे फिर से मुलाकात होगी। तब तक के लिए आप हंसते रहें, खुश रहें और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहें। 


धन्यवाद!

जय श्री कृष्ण 🙏

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