क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप है या पुण्य

VISHVA GYAAN

क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? 


भगवान को आपकी थाली नहीं, आपका दिल चाहिए - लेकिन क्या मांस खाने से भक्ति अधूरी हो जाती है?



हर हर महादेव! प्रिय पाठकों 🙏
भोलेनाथ का आशीर्वाद आप सभी को प्राप्त हो।

प्रिय पाठकों !जैसा की हम सभी लोग जानते हैं कि आज के समय में हर कोई भोजन में मांसाहारी खाने का सेवन किसी न किसी रूप में अवश्य करता है ।

परंतु क्या ? 

आपने कभी सोचा है कि जो मनुष्य मांसाहारी भोजन करते है और फिर ईश्वर की पूजा करते है। क्या ऐसे मनुष्यों की पूजा ईश्वर स्वीकार करते हैं? अगर नहीं सोचा ,तो चलिए आज हम इसी के बारे मे आपको जानकारी देते है। 


प्रिय पाठकों ! इस सवाल का उत्तर अपने हिन्दू धर्म ग्रंथो जैसे वराह पुराण ,स्कंद पुराण,भागवत गीता आदि में विस्तार से किया गया है। मित्रों स्वागत है आपका एक बार फिर विश्वज्ञान मे।

संक्षिप्त उत्तर 


हिंदू धर्म में मांस खाना न पूरी तरह पाप माना गया है और न ही पुण्य। कुछ परिस्थितियों में इसकी अनुमति है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से शाकाहार (सात्त्विक भोजन) को श्रेष्ठ माना गया है। भगवान पूजा को व्यक्ति के भाव (भावना) से स्वीकार करते हैं, न कि केवल भोजन से।



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं?मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 

स्कन्द पुराण


दोस्तों स्कन्द पुराण के काशी खंड तीसरे अध्याय में बताया गया है कि -


जो मनुष्य मांस खाता है, उसके जीवन को धिक्कार है। ऐसे मनुष्य को ना तो मृत्यु लोक में कभी सुख मिलता है और ना ही मृत्यु के बाद दूसरे लोक में ही सुख मिलता है ।



साथ ही स्कंद पुराण में एक प्रसंग का और भी वर्णन मिलता है कि - 


जिसके अनुसार जब एक बार सभी देवता गण काशी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहाँ बाघ जैसे हिंसक पशु भी घास खा रहे हैं ।


क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 

अगर भूख से किसी प्राणी की मृत्यु होने को हो ,तो भी उसे माँस नहीं खाना चाहिए ।इतना ही नहीं स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव उन लोगों की भक्ति अथवा पूजा कभी स्वीकार नहीं करते जो मांस मदिरा का सेवन करते हैं । 



वराह पुराण 


स्कंद पुराण के अलावा वराह पुराण में भी इस बात का वर्णन मिलता है - जिसके अनुसार जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया तब पृथ्वी देवी यानी -


धरती माँ ने उनसे पूछा कि-


भगवन क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा स्वीकार होती है ? 


क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 

पृथ्वी देवी के पूछने पर भगवान विष्णु ने कहा- 


जो मनुष्य मांस का भक्षण करता है अथार्त खाता है ,मैं ना तो उसकी पूजा ही स्वीकार करता हूं और ना ही उसे अपना भक्त मानता हूं।साथ ही -



भगवान विष्णु के वराह अवतार पृथ्वी देवी से यह भी कहते हैं - 


कि जो मनुष्य मछली या दूसरे पशुओं के मांस का सेवन करता है।  मेरे लिए उससे बड़ा अपराधी और कोई भी नहीं



गीता के अनुसार 


इसके अलावा गीता में भगवान ने यह भी बताया है कि-मनुष्यों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। 


भगवान कृष्ण के अनुसार-

  • माँस एक तामसिक भोजन है 
  • जिसके सेवन यानी खाने से बुद्धि क्षीण 
  • अथार्त कमजोर होने लगती है और 
  • मनुष्य अपनी इंद्रियों पर से नियंत्रण खो देता है ।
  • उसके बाद मनुष्य ना चाहते हुए भी 
  • कई तरह के अपराधों का भागीदार बन जाता है


ऐसा मनुष्य जब मेरी पूजा करता है या मुझे याद भी करता है तो मैं उसके पास नहीं जाता। 


साथ ही गीता में भगवान श्री कृष्ण यह भी कहते हैं कि- मांसाहार भोजन राक्षसों के लिए है , ना कि इंसानों के लिए। 



आहार के 3 वर्ग


गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आहार को 3 वर्ग सत्व ,रज और तम में विभाजित किया है जिसके अनुसार -


  • सात्विक आहार आयु को बढ़ाने वाला, 
  • मन को शुद्ध करने वाला ,
  • बल बुद्धि ,स्वास्थ्य और तृप्ति प्रदान करने वाला होता है। 


जब यही शाकाहारी आहार-


  • बहुत ज्यादा खट्टा ,नमकीन 
  • अथवा ज्यादा तेल मसाले डालकर पकाया जाए 
  • तो ये भोजन राजसी भोजन बन जाता है।  
  • और ये राजसी भोजन दुःख ,शोक एवं 
  • कई प्रकार के रोग उत्पन्न करता है।


स्वयं श्री कृष्ण द्वारा बतायी गई कथा से जाने - मांस खाना पाप है या पुण्य 



इस कथा का वर्णन गरूड़ पुराण में दिया गया है। 


एक बार की बात है ,प्रभु  श्री कृष्ण यमुना किनारे एक पेड़ के नीचे बैठ कर बांसुरी बजा रहे थे। तभी अचानक एक हिरण भागता हुआ आया और प्रभु के पीछे जाकर छुप गया। हिरण बहुत डरा हुआ था। 



प्रभु ने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए पुछा -


कि क्या बात है ? तुम इतने डरे हुए क्यों हो। तभी इतने में एक शिकारी भी वहाँ आ पहुंचा।



और  प्रभु से बोला-


कि ये मेरा शिकार है। कृपया इसे मुझे दे दो। 



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं?मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


भगवान् श्री कृष्ण बोले


हर जीवित प्राणी पर सबसे पहले उसका अपना अधिकार होता है। न की किसी और का। ये सुनकर शिकारी को क्रोध आ गया।


 

उसने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा -


ये मेरा शिकार है। इसे मैंने पकड़ा है और इसलिए मैं इसे पकाकर खाऊंगा। तुम मुझे ज्यादा ज्ञान मत बांटो। 


भगवान और भक्त की सच्ची कहानी



इस पर भगवान् श्री कृष्ण फिर बोले -

 

किसी भी जीव को मारकर खाना पाप है। क्या तुम इसे खाकर पाप के भागी बनना चाहते हो ? मांस खाना पाप है या पुण्य क्या ये तुम नहीं जानता ? 



तब वह शिकारी बोला - 


मैं आपकी तरह ज्ञानी नहीं हूँ। मैं नहीं जनता मांसाहार पुण्य है या पाप। मैं बस इतना जानता हूँ। कि यदि मैंने शिकार नहीं किया तो मुझे खाना नहीं मिलेगा। मैं इस हिरण को जीव बंधन से मुक्त कर पुण्य ही तो कमा रहा हूँ। 



फिर आप क्यों मुझे ये पुण्य कमाने से रोक रहे है। जहां तक मैने सुना  है की जीव हत्या तो शास्त्रों में भी ठीक ही बताई गई है। राजा लोग भी तो शिकार  करते है। क्या ये पाप सिर्फ मुझ ग़रीब के लिए ही है। 



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


ऐसे बहुत से उदाहरण देते हुए शिकारी प्रभु श्री कृष्ण से बोला कि -


अब आप ही बताइये मांस खाना पुण्य है या पाप। शिकारी के मुँह से इस प्रकार की बातें सुनकर श्री कृष्ण जी समझ गये की इसकी बुद्धि मांस खाने से तामसिक हो गई है। जिस कारण इसने सोचने और समझने की शक्ति खो दी है। 



फिर उसके बाद श्री कृष्ण जी बोले -


मैं तुमको एक कथा सुनाता हूँ। जिसे सुनकर तुम ही बताना मांस खाना पाप है या पुण्य। 



अब शिकारी ने सोचा-


मैं इस कथा को सुन ही लेता हूँ। इसी बहाने मेरा थोड़ा मनोरंजन भी हो जाएगा। और बाद में मुझे इस हिरण का मांस भी मिल जाएगा। 



श्री कृष्ण जी ने कथा आरम्भ की। 


वे बोले की -एक बार की बात है। मगद राज्य में अकाल पड़ा। जिस कारण  चिंता सताने लगी की यदि इस चिंता का समाधान नहीं हुआ तो इकठ्ठा किया हुआ सारा धन भी समाप्त हो जाएगा। 



इस समस्या से निपटने के लिए राजा ने राजसभा बिठाई। सभा में मौजूद मंत्री और सिपा सलाहकारों से समाधान पूछा की किस तरह इस समस्या से बाहर निकले। और पूछा की राज्य सभा की इस खाद्यसामग्री को सुलझाने के लिए कौन सी वस्तु सबसे ज्यादा सस्ती है। ये सुनकर सभी मंत्रीगण आदि सोचने लगे चावल ,गेहूं ,आलू उगाने के लिए तो बहुत मेहनत करनी पड़ती है और समय भी बहुत लगता है। 



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
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ऐसे में तो कुछ भी सस्ता नहीं हो सकता। 


तभी शिकार का एक शौक रखने वाले शिकारी ने खडे होकर कहा- 


महाराज !मेरे मुताबिक़ सबसे सस्ती खाने की वस्तु मांस है। इसके लिए धन भी नहीं खर्च करना पड़ता और पौष्टिक खाना भी मिल जाता है। ये सुनकर सभी सामंतों ने इस बात का समर्थन कर दिया। लेकिन मगद के मंत्री अभी भी चुप थे। ये देख कर -


राजा ने मंत्री से पूछा- 


आप क्यों चुप है। कुछ बोलते क्यों नहीं। तुम्हारी क्या सलाह है। 


तब मंत्री बोले की-

 

मैं नहीं मानता की मांस सबसे ज्यादा सस्ता खाद्यपदार्थ है। फिर भी इस विषय में मई अपने विचार कल रखूंगा। उसके बाद रात को मंत्री उसी सामंत  के घर गये जिसने सभा में मांस को सस्ता बताया था। सामंत ने मंत्री को इतनी रात में अपने घर आया देखकर घबरा गया और किसी अनिष्ठ के होने आशंका के बारे सोचकर घबराने लगा। 


मंत्री ने सामंत से कहा कि '

  • संध्या (शाम )को प्रधानमंत्री बीमार हो गए। 
  • उनकी हालत बहुत गंभीर है। 
  • राजवैद्य ने कहा है की 
  • शक्तिशाली देह (शरीर )का 2 तौला मांस मिल जाए तो 
  • राजा के प्राण बचाये जा सकते है। 

आप महाराज के सबसे ज्यादा निकट है। इसके लिए आप जो भी मूल्य लेना चाहे ,वो ले सकते है। आप कहे तो इस काम के लिए मैं आपको एक लाख सोने की मुद्राये भी दे सकता हूँ। इसके अलावा एक बहुत बड़ी जागीर भी आपके नाम कर दी जायेगी। 



आप केवल बस हाँ कर दीजिए।

मैं कटार से आपके हृदय को चिर कर केवल 2 तौले मांस निकाल लूंगा। ये सुनकर सामंत के चेहरे का रंग उड़ गया।



वह सोचने लगा की -

जब जीवन ही नहीं रहेगा तो इन मुद्राओं का मैं क्या करूँगा। वो तुरंत अंदर गया और 1 लाख सोने की मुद्राएं लाकर मंत्री को देकर उनके पैर पकड़ लिए और उनसे -


हिचकिचाते हुए कहा की -

  • मंत्री जी मैं आपकी 1 लाख सोने की मुद्राओं में
  • ये 1 लाख सोने की मुद्राएं और जोड़ता हूँ। 
  • इस पैसो से आप किसी और के हृदय का मांस खरीद लें। 
  • किन्तु मुझे छोड़ दे। 
  • कृपया मेरी आपसे ये विनती है की -
  • आप ये बात किसी ओर से न कहे। 


इस पर मंत्री जी ने फिर कहा -

  • सामंत जी आप शरीर से हृष्टपृष्ट है 
  • और आपकी कदकाठी भी महाराज से बहुत मिलती है। 
  • इसलिए राजा ने आप ही का नाम लिया है। 
  • आपके दान से हमारे राजा की जान बच सकती है। 
  • यदि आप माने तो मैं आपको प्रधानमंत्री का पद भी दे सकता हूँ। 
  • और खुद आपका कर्मचारी बनने के लिए भी तैयार हूँ। 


सामंत ने जब खुद को फंसता हुआ देखा तो उसने  मंत्री से फिर विनती की और 


उसने कहा की-

  • मैं इस पद के योग्य नहीं हूँ। 
  • जब प्राण ही नहीं रहेंगे तो मंत्री बन कर क्या करूंगा। 
  • आप चाहे तो मेरा सबकुछ ले  लें। 
  • पर कृपया आप मुझे छोड़ दें। 
  • इतना कहकर सामंत अपने घोड़े की तरफ भागा। 
  • जैसे ही वह घोड़े पर बैठ कर चलने के लिए तैयार हुआ ,


तो मंत्री ने घोड़े की रस्सी पकड़ ली और सामंत से कहा-

आपको भागने की जरूरत नहीं है। मैं किसी और से पूछ लूंगा। 


क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


ऐसा कहकर मंत्री वहां से चले गये। उसके बाद मुद्राएं लेकर मंत्री एक -एक करके बाकी अन्य सामंतो के पास गए। और सभी से राजा के हृदय के लिए 2 -2 तौले मांस माँगा। पर कोई भी राज़ी नहीं हुआ और सभी सामंतो ने अपने बचाव के लिए मंत्री जी को राजा के इलाज के लिए 1 लाख से लेकर 5 लाख मुद्राएं दी। 



इस प्रकार मंत्री ने एक ही रात में 1 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं इकट्ठी की और सुबह होने से पहले ही अपने महल में पहुंच गए। 



अगले दिन सभी सामंत राजा के दरबार में समय से पहले ही पहुंच गए। वे सब जानना चाहते थे की राजा का स्वास्थ कैसा है। पर कोई भी एक -दूसरे को रात की बात नहीं बता रहे थे। थोड़ी देर बाद राजा हमेशा कि तरह अपने अंदाज़ में आये और सिंहासन पर बैठ गए। सभी ने देखा की राजा तो कहीं से भी अस्वथ नहीं लग रहे। उन्हें तो कुछ हुआ ही नहीं था। वे सब जान गए की मंत्री ने उनसे मज़ाक किया था। 



सभी मन में विचार कर ही रहे थे की इतने में मंत्री जी आये और राजा के सामने 1 करोड़ सोने की मुद्राएं रख दी। 



ये देख कर  राजा ने पुछा की -


ये मुद्राएं किसके लिए है और कहाँ से आई है। 



तब मंत्री ने जवाब दिया वे बोले कि 

हे महाराज-  2 तौले मांस के लिए मैंने ये इतनी धनराशि इकट्ठी की है। पर कही से भी मांस नहीं मिला। अपनी -अपनी जान बचाने के लिए सभी सामंतो ने ये मुद्राएं दी है। अब आप ही बताइये मांस सस्ता है या महंगा। 



राजा को बात समझ आ गई। उन्हें मंत्री की साझदारी पर प्रसन्नता हुई। उन्होंने प्रजा से निवेदन किया की सभी लोग कठिन मेहनत करें।और उसके बाद राजा ने राजकीय अनाज भण्डार में से अनाज निकाल कर श्रमिकों को दिया। राजा ने सभी को पौष्टिक सब्जियों को उगाने का आदेश दिया। सिचाई की व्यवस्था ठीक की गई। इकट्ठे किये गए सारे धन को इसी काम में व श्रमिकों के कल्याण के लिए खर्च की गई। 



कुछ समय पश्चात श्रमिकों की मेहनत रंग लाई। साग -सब्जियाँ ,फल आदि  इतने अच्छे से उगे की सब लोग कल्याण हुआ और पौष्टिक -पौष्टिक चीजें भी खाने को मिली। मौसम अनुकूल होने पर फसलें भी लहलहाने लगी। इस प्रकार राज्य का खाद्य संकट ख़त्म हुआ। 



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


स्वयं भगवान् से यह ज्ञान पाकर शिकारी खुश हुआ। वह जान गया की महानता जान  लेने में नहीं बल्कि जीवन देने में है। उसके बाद शिकारी ने  प्रभु के आगे सिर झुकाकर प्रणाम किया और वहां से चला गया। वहां से जाने के बाद उसने प्रतिज्ञा की कि वह कभी भी शिकार नहीं करेगा व किसी को कष्ट नहीं पहुँचायेगा। 



प्रिय पाठकों इस कहानी के जरिए प्रभु श्री कृष्ण हमे समझा रहे है की जिस तरह हमे अपनी जान  प्यारी है उसी प्रकार अन्य लोगों ,जीवों को भी अपनी जान प्यारी है। 



दोस्तों इस  कथा को पढ़ कर आप ये अच्छे से समझ गए होंगे की कौन सा आहार खाना चाहिए और कौन सा नहीं। ये आप पर निर्भर करता है। यहां तक की आज के विज्ञान ने भी इस बात स्वीकार कर लिया है की मांसाहार आहार की अपेक्षा शाकाहार आहार ज्यादा फायदेमंद होता है। 


विज्ञान के अनुसार 


विज्ञान के अनुसार माने तो जहां एक ओर शाकाहारी भोजन हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने का काम करता है तो वहीं दूसरी ओर शाकाहारी भोजन खाने से आयु भी बढ़ती है। 



धर्मग्रंथ और गलतफहमी 


प्यारे दोस्तों! कुछ लोगो के मुताबिक़ कुछ धर्मग्रंथो में मांसाहार को सही बताया गया है। परन्तु ये सारे भ्रम उन ग्रंथो में मौजूद मंत्रो व श्लोकों के गलत अर्थ के प्रचार प्रसारहिन्दुओं में होने वाली पशु बलि के कारण फैले हुए है। 



जिन जीवो को मारकर जो भी मनुष्य उन्हें खा रहे है। उन जीवो को तो अपने प्राण बचाने का भी अवसर नहीं मिलता। हिंसकता सिर्फ वही नहीं है जहां इन्सान का रक्त बहे। हिंसकता उसे भी कहा जाता है। जहां स्वाद के लिए अन्य जीवों की हत्या कर दी जाए। 


 

हिंदू धर्म में मांस खाना सही है या नहीं-


इसके बारे में कई लोगों के मन में भ्रम है और उसका मुख्य कारण है लोगों का धर्म शास्त्रों में वर्णित ज्ञान का ना होना। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है की वेद मांस खाने को जायज बताता है। 



लेकिन यह सच नहीं है -


सच तो यह है कि वेदों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि पशु हत्या अर्थात पशु बलि पाप की श्रेणी में आता है। वेदों का सार उपनिषद और उपनिषदों का सार गीता है। जिसके अनुसार वेदों में मांस खाने के संबंध में स्पष्ट मना किया गया है। 



वेदों में बताया गया है कि -


जो मनुष्य नर,अश्व अथवा -

किसी अन्य पशुओं का मांस का सेवन कर -

उसको अपने शरीर का भाग बनाता है।

गौ कि हत्या कर अन्य जनो को दुध आदि से वंचित करता है। 

उससे बड़ा पापी इस सृष्टि में कोई भी नहीं । 




यजुर्वेद में बताया गया है कि -


मनुष्यों को परमात्मा की सभी रचना को अपनी आत्मा के समान मानना चाहिए। वो जैसे अपना हित चाहते हैं-वैसे ही अन्य जीवों का भी हित करें। 



वेदों में कहा गया है कि -


हे मनुष्यो तुम चावल ,दाल, गेहूं आदि -

खाद्य पदार्थ आहार के रूप में करो। 

यही तुम्हारे लिए सबसे उत्तम और -

रमणीय  भोज्य पदार्थों का भाग है। 

तुम किसी भी नर और मादा की कभी हिंसा मत करो।

वह लोग जो नर और मादा भ्रूण और 

अंडों के मांस से उपलब्ध हुए मांस को कच्चा या -

पका कर खाते हैं तुम्हें उनका विरोध करना चाहिए।



क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


वही ऋग्वेद में भी बताया गया है कि -


गाय जगत की माता है और उनकी रक्षा में ही समाज की उन्नति है।मनुष्य को उनके समान सभी चार पैर वाले पशुओं की रक्षा करनी चाहिए।



वहीं गरुड़ पुराण में -


भगवान विष्णु पक्षीराज गरुड़ को एक कथा सुनाते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य मांस का भक्षण करता या फिर मदिरा का सेवन करता है। 



उसकी भक्ति या पूजा कोई भी देवता स्वीकार नहीं करते और ऐसे मनुष्यों की ना ही कोई देवता मदद करते हैं। इसलिये मनुष्य को चाहिए कि वह सात्विक भोजन करें। ताकि उसे अपने जीवन काल और मृत्यु के बाद भी ईश्वर का सानिध्य मिल सके और वह सुखी पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सके।



भगवान विष्णु कहते हैं कि -


जो मनुष्य स्वाद के लिए दूसरे पशुओं की हत्या करता है। उसे मृत्यु के बाद उसी पशु योनि में कई जन्मों तक जन्म लेना पड़ता है और वह भी उसी तरह मारा जाता है ,जैसे उसने खाने के लिए उस पशु को मारा था। 




अंत समय आते -आते हम जिंदगी भर के पापों के लिए सुकर्म करने की कोशिश करते रहते है। परन्तु  हम  ये भूल जाते है की जब वह जीव  हमारे लिए काटा गया और तड़पा तो उसका श्राप हमें इस जीवन में ही नही बल्कि अगले  जन्म में भी नहीं छोड़ता।


इसलिए कहा गया है कि जैसी मति वैसी गति 

 

क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं?मांस खाना पाप हैया पुण्य
क्या मांस खाने वाले लोगों की पूजा भगवान स्वीकार करते हैं? मांस खाना पाप हैया पुण्य 


इसलिए  मित्रों -


अगर आप पूजा या फिर ईश्वर  भक्ति  में विश्वास रखते हैं तो मांसाहार का सेवन करना बंद कर दीजिए। वैसे भी मांसाहार भोजन को वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं माना गया है। यह मनुष्य को कई तरह के रोगों से ग्रसित भी कर देता है और जहां तक धार्मिक मान्यता की बात है तो उम्मीद करते है कि आपको वह समझ आ ही गई होगी। 




तो प्रिय पाठको !आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताएं और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप अपने मित्रों व अन्य लोगों को भी बताये जिससे संसार में यह पाप न फैले। 



सभी लोग जीवों से प्यार करें व उनका ख्याल रखें। इसी के साथ भगवान से आपके जीवन की मंगलकामना करते हुए हम आपसे विदा लेते है। 


धन्यवाद। 

हर हर महादेव 🙏

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