पूजा करते समय नींद क्यों आती है?

VISHVA GYAAN

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जैसे ही आप पूजा, जप या पाठ करने बैठते हैं, कुछ ही मिनटों में आँखें भारी होने लगती हैं? क्या यह केवल थकान है, मन की चंचलता है या फिर इसके पीछे कोई आध्यात्मिक कारण भी हो सकता है? आइए जानते हैं इस अनुभव के पीछे छिपे आध्यात्मिक और व्यावहारिक पहलुओं को।


पूजा करते समय नींद क्यों आती है?

संक्षिप्त उत्तर:

पूजा या जाप करते समय नींद आना एक शुभ संकेत है। जब साधक मंत्र जाप के मानसिक स्तर (एकाग्रता की उच्च अवस्था) पर पहुँचता है, तो उसका शारीरिक भाव मिट जाता है और आत्मा ईश्वर में रम जाती है। यह वास्तविक नींद नहीं, बल्कि ध्यान और शक्तियों के जाग्रत होने की आध्यात्मिक अवस्था है।


जय श्री राम! 🙏

प्रिय पाठकों, आप सभी का विश्वज्ञान में हार्दिक स्वागत है। आशा करते हैं कि आप सभी स्वस्थ, प्रसन्न और प्रभु की कृपा से सुखी होंगे।


आज हम एक ऐसे प्रश्न पर चर्चा करेंगे, जो लगभग हर साधक के मन में कभी न कभी अवश्य आता है—"पूजा करते समय नींद क्यों आती है?"


बहुत से लोग बताते हैं कि जैसे ही वे भगवान का नाम जपना शुरू करते हैं, माला लेकर बैठते हैं या किसी स्तोत्र का पाठ करते हैं, कुछ ही देर में उन्हें नींद आने लगती है। कभी-कभी आँखें बार-बार बंद होने लगती हैं, तो कभी ऐसा लगता है मानो कुछ क्षणों के लिए नींद आ गई हो।


ऐसे में मन में कई सवाल उठते हैं—क्या यह शुभ संकेत है? क्या भगवान हमारी पूजा स्वीकार नहीं कर रहे? क्या यह केवल शरीर की थकान है, या फिर साधना से जुड़ा कोई आध्यात्मिक अनुभव?


इस लेख में हम इन सभी प्रश्नों का उत्तर शास्त्रीय दृष्टिकोण, आध्यात्मिक अनुभवों और व्यावहारिक कारणों के आधार पर समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि किन परिस्थितियों में पूजा के दौरान नींद आना सामान्य है और कब इसे साधना की गहराई से जोड़कर देखा जा सकता है।


तो आइए, बिना किसी देरी के विस्तार से जानते हैं—पूजा करते समय नींद क्यों आती है? 


पूजा करते समय नींद क्यों आती है। 


पूजा करते समय नींद क्यों आती है?
पूजा करते समय नींद क्यों आती है?

मित्रों अधिकतर लोगों के साथ,जो पूजा पाठ ज्यादा करते हैं या कभी-कभी करते हैं लेकिन पूरे मन से,भक्ति भाव से करते है,वो जब पूजा करने बैठते हैं या माला जप करने बैठते हैं या स्तुति करते हैं, तो उन्हें नींद आने लगती है। माला भी कभी कबार हाथ से छूट जाती है। 


इसके अलावा कभी-कभी व्यक्ति को केवल नींद के झोंके आने लगते हैं ,तो कभी-कभी उन्हें ऐसा महसूस होता है कि पूजा करते-करते वो पूरे तरीके से सो गए हों। नींद की ये अवस्था कभी-कभी ऐसी भी होती है कि, जब आप स्तुति या कोई पाठ कर रहे हों, उस वक्त जब आपको नींद आती है, तो आप सो जाते हैं लेकिन पाठ पढ़ना नहीं छोड़ते और अचानक जब आंख खुलती हैं तो आपको लगता है कि आप सो गये थे। तो जब आप सो गए थे, तो फिर पढ़ कैसे रहें थे?


प्रिय दोस्तों! ये स्थिति ही कुछ ऐसी होती हैं की आप सो भी रहे होते है और पढ़ भी रहें होते हैं यानी आपका शरीर सो गया, लेकिन आत्मा नहीं सोयी। आपकी आत्मा प्रभु मे इस कदर रम गई की आपको अपनी भी सुध नही रही।


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मित्रों! जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है,तो व्यक्ति घबराने लगता है,उन्हें लगने लगता है कि उनकी पूजा बेकार हो गई हैं। इस पूजा का कोई फल नहीं।इसके अलावा उन्हें कोई अनहोनी होने का अंदेशा होने लगता है,यानी कही कुछ गलत तो नही होने वाला। वो मन मे ऐसी धारणा बना लेते है। पर ऐसा बिलकुल भी नही है दोस्तों। 


मित्रों सबसे पहले तो हम आपसे इतना कहना चाहेंगे कि आप कोई भी काम करें, फिर चाहे वो पूजा पाठ से संबंधित हों या अन्य कार्यो से संबंधित। उस हरेक कार्य को आप सकारात्मक बुद्धि से करें। क्योंकि नकारात्मक सोच के मन में आते ही  सारे अच्छे किए कराये कार्यो पर पानी फिर जाता है। 


आप यदि पूजा पाठ करते हैं तो अपनी पूजा, अपने इष्ट पर भरोसा रखें। अपनी सोच को शुद्ध रखें, सकारात्मक रखें। कभी भी ऐसा न सोचे की आपकी पूजा बेकार हो गई ,इसका कोई फल नही। भगवान आपकी पूजा स्वीकार करेंगे या नही करेंगे। ऐसा बिल्कुल भी न सोचे, क्योंकि हर कर्म का फल इंसान को अवश्य मिलता है। 


जैसा कर्म होगा वैसा ही फल प्राप्त होगा। हां, ये हो सकता है कि फल देर से प्राप्त हो लेकिन प्राप्त जरूर होगा। इसमे कोई संदेह नही। इसलिए जीवन के हर कार्य को करते समय अच्छी सोच रखें। 


मित्रों ! ये एक विश्वास ही होता है जो मनुष्य को मजबूत बनाता है।और इस बात का सबूत है दक्षिनेश्वर मंदिर के स्वामी राम कृष्ण परमहंस,जिन्होंने पत्थर मे से माँ काली को प्रकट किया। इस उदाहरण से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। ये विश्वास बनाना चाहिए कि हम कभी भी डगमगायेंगे नही। 


अब बात करें पूजा करते समय नींद आने की तो मित्रों पूजा करते समय नींद या नींद के झोंके तभी आते हैं जब साधक यानी पूजा करने वाला व्यक्ति या भक्त अपने इष्ट के मंत्र, स्तुति या जप करने मे इतना तल्लीन हो जाता है कि, उसे खुद को भी ये होश नहीं रहता की, वो  क्या कर रहा है। 


मित्रों ये स्थिति साधक की एक ही बार पूजा करने से नहीं होती। इससे पहले साधक को मंत्रों की कई अवस्थाओ को पार करना होता है। जिसमें साधक पहले तो मंत्रों को बोलकर जाप करता है। फिर महीने या दो महीने बाद यही जाप उपांसू जाप मे बदल जाता है। 


उपांसू जाप का मतलब है जिसमें साधक के होंठ और जीभ तो चलती लेकिन आवाज इतनी हल्की निकलती है कि, पास बैठे हुए व्यक्ति को भी नहीं सुनाई देती। यानी पास बैठे हुए व्यक्ति को ये तो महसूस होगा कि, ये कुछ बोल रहा, पर क्या बोल रहा है, ये साफ सुनाई नहीं देगा। उपांसू जाप को आप बुदबुदाना भी कह सकते हैं। 


इस जाप को करते-करते भी जब आपको महीना या 2 महीना बीत जाएगा,तब यही उपांसू जाप आपका मानसिक स्तर में बदल जाएगा। मानसिक स्तर यानी जिसमें पूजा करते समय होंठ और जीभ का हिलना बंद हो जाता है और जो भी स्तुति, जाप और मंत्र होते हैं, वो मन के द्वारा होने लगते हैं। यानी आप बिना मुहँ से बोले केवल मन से पाठ या स्तुति करते हैं। 

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मित्रों! इस मानसिक जाप मे अगर साधक चाहे भी न कि वो बोलकर मंत्र पढ़े, लेकिन तब भी वो बोलकर पूजा नहीं कर पाएगा। सभी जापों मे मानसिक जाप अधिक महत्वपूर्ण और सर्वोत्तम है। 


जब साधक मानसिक स्तर तक पहुंच जाता है तब ऐसी स्थिति पैदा हो जाती कि उन्हें नींद आने लगती है या नींद के झोंके आने लगते हैं। इस स्थिति में साधक का अपने शरीर और मन पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। वो सोने के जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। 


ये नींद वास्तविक नींद से बहुत अलग हो होती है। इसमे साधक सोता नहीं है। पर उसको लगता है कि वो सो गया है। इस स्थिति मे उनके हाथ से माला भी छूट कर गिर सकती है और खुद व्यक्ति,साधक या भक्त जो भी आप कहते हो, वो भी नींद के झोंके से गिर सकता है। 


नींद के झोके से गिरने के बाद जब आप दोबारा होश आने पर उठते है, तो आपको लगता है कि, अरे! मैं तो सो गया था। पर नहीं आप सोये नहीं थे। ये आत्मा की एक अलग अवस्था थी। जिसमें आपका शरीर ज्ञान लुप्त हो गया था। 


ये बड़ी उच्च स्थिति की बात है , बड़ी उच्च स्थिति की अवस्था है। ये एकाग्रता की अवस्था होती है। इसी अवस्था के और सुदृन हो जाने पर शरीर समाधिस्थ होने लगता है और यही एक साधक का लक्ष्य होता है। 


ये अवस्था शक्तियों के जाग्रत होने की अवस्था होती है। इसी अवस्था में पराशक्तियों का प्राकट्य होता है।  प्राकट्य यानी प्रकट होना। जिस किसी भी भगवान की साधक पूजा करता है, वह प्रसन्न होकर इसी अवस्था मे आकर उनको दर्शन देते हैं। इसी अवस्था में साधक को सिद्धियां प्राप्त होती है। ये अवस्था उत्तम अवस्था होती है। इसलिए इसमे घबराने की नहीं बल्कि प्रसन्न होने की आवश्यकता होती है। 


कुल मिलाकर दोस्तों पूजा करते समय नींद आना एक शुभ संकेत है। इससे पता चलता है कि आपकी पूजा की दिशा और दशा दोनों ही सही है। इसलिए आपको बिलकुल भी नकारात्मक सोच नहीं रखनी है। बिलकुल भी डरना नहीं है। बिलकुल भी घबराना नही है। 

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FAQs

क्या पूजा करते समय नींद आना अशुभ होता है?

बिल्कुल नहीं। यह अत्यंत शुभ संकेत है, जो दर्शाता है कि आपकी पूजा सही दिशा में जा रही है और आपकी एकाग्रता बढ़ रही है।


उपांशु और मानसिक जाप में क्या अंतर है?

उपांशु जाप में केवल होंठ हिलते हैं और हल्की बुदबुदाहट होती है, जबकि मानसिक जाप में बिना होंठ या जीभ हिलाए केवल मन ही मन जाप किया जाता है।


अगर पूजा के दौरान हाथ से माला छूट जाए तो क्या करें?

घबराएं नहीं। ध्यान की उच्च अवस्था में शरीर पर नियंत्रण न रहने से ऐसा होता है। ईश्वर का ध्यान करके माला उठाकर पुनः जाप शुरू करें।


पूजा में मन बार-बार भटकता है, क्या करें?

नियमित समय पर पूजा करें, पर्याप्त नींद लें, कुछ मिनट गहरी श्वास लें और धीरे-धीरे मन को मंत्र पर केंद्रित करें।


क्या भोजन के तुरंत बाद पूजा करने से नींद आती है?

हाँ। भोजन के बाद पाचन प्रक्रिया सक्रिय होने से कई लोगों को स्वाभाविक रूप से नींद आने लगती है।


क्या मानसिक जप सबसे श्रेष्ठ माना गया है?

अनेक ग्रंथों में मानसिक जप को अत्यंत प्रभावी माना गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वाचिक या उपांशु जप का महत्व कम है। साधक अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी विधि से जप कर सकता है।


पूजा करते समय क्या करें ताकि नींद न आए?

सुबह स्नान के बाद पूजा करें, पर्याप्त नींद लें, भोजन के तुरंत बाद पूजा न करें और रीढ़ सीधी रखकर बैठें।


अब आपकी बारी 

क्या आपके साथ भी पूजा करते समय नींद आने का अनुभव हुआ है?

आपको यह अनुभव जप के समय होता है या ध्यान के समय?

क्या आपने कभी पूजा के दौरान गहरी शांति या अलग अनुभव महसूस किया है? 

अपने अनुभव और विचार कमेंट में हमारे साथ अवश्य साझा करें। आपकी बात किसी दूसरे साधक की भी मदद कर सकती है।


प्रिय पाठकों,

आशा करते हैं की आपको post पसंद आई होगी और आपको आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। और आप उत्तर से संतुष्ट होंगे।


इसके अतिरिक्त यदि आपका कोई प्रश्न हो, आप कुछ पूछना चाहे तो निस्संकोच पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्न का उत्तर देने की पूरी कोशिश करेंगे। इसी के साथ विदा लेते हैं। विश्वज्ञान मे अगली पोस्ट के साथ फिर मिलेंगे। आप अपना ख्याल रखें, खुश रहें और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहें। 


धन्यवाद 
जय श्री राम 🙏

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