युवा पीढ़ी गुमराह क्यों हो रही है?
युवा पीढ़ी इसलिए गुमराह हो रही है क्योंकि उसे लक्ष्य तो दिए जा रहे हैं, लेकिन जीवन की दिशा नहीं।
सोशल मीडिया की तुलना, शिक्षा में संस्कारों की कमी, संवादहीन परिवार और दिखावटी सफलता की दौड़ ने युवाओं को भीतर से भ्रमित कर दिया है।
कैसे है आप लोग आशा करते हैं कि आप स्वस्थ, प्रसन्नचित और प्रभु की कृपा में होंगे।
“आख़िर हमारी युवा पीढ़ी गलत दिशा में क्यों जा रही है?”
- मोबाइल हाथ में है,
- जानकारी भरपूर है,
- सुविधाएँ पहले से ज़्यादा हैं—
फिर भी युवा उलझा हुआ है, बेचैन है, और भीतर से खाली महसूस कर रहा है।
यह हमारे समाज, शिक्षा, परिवार और सोच--
हम सबकी कहानी है।
इस लेख में हम बिना आरोप लगाए,
युवा पीढ़ी गुमराह क्यों हो रही है?
इसके पीछे असली कारण क्या हैं?
और क्या अभी भी दिशा बदली जा सकती है?
युवा पीढ़ी गुमराह क्यों हो रही है?
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| आज की युवा पीढ़ी बाहरी दौड़ में उलझकर भीतर से थकती जा रही है। |
1- दिशा नहीं, सिर्फ़ दौड़ सिखाई जा रही है
- ज़्यादा पैसा, ज़्यादा शोहरत, ज़्यादा लाइक्स = तो सफलता मिलेगी।
- “क्यों जीना है, कैसे जीना है और किसके लिए जीना है।”
जब लक्ष्य केवल बाहर का दिखावा बन जाए, तो भीतर खालीपन आना तय है।
2- आदर्श बदले जा चुके हैं
पहले आदर्श थे-
- राम, कृष्ण, विवेकानंद, भगत सिंह
आज आदर्श बन गए हैं-
- रियलिटी शो के सितारे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, दिखावटी सफलता वाले लोग।
समस्या यह नहीं कि ये लोग हैं,
- समस्या यह है कि इनके जीवन का केवल चमकता हिस्सा दिखाया जाता है, संघर्ष, अनुशासन और त्याग नहीं।
3- सोशल मीडिया: तुलना की बीमारी
सोशल मीडिया पर हर कोई खुश, सफल और परफेक्ट दिखता है।
युवा सोचता है-
- “सब आगे बढ़ गए, मैं ही पीछे रह गया।”
यह लगातार तुलना मन में-
- हीनभावना
- ग़ुस्सा
- निराशा
- गलत रास्तों की ओर झुकाव
- पैदा कर देती है।
जानिए- डिजिटल युग के शोर में संस्कारों की पुकार क्यों दबती जा रही है
4- शिक्षा में संस्कार नहीं, सिर्फ़ करियर
स्कूल-कॉलेज सिखाते हैं-
- कैसे कमाना है
- कैसे जीतना है
लेकिन नहीं सिखाते-
- हार को कैसे सहना है
- रिश्ते कैसे निभाने हैं
- मन को कैसे संभालना है
और इसका नतीजा यह निकलता है कि-
जब जीवन में संकट आता है, तो युवा अंदर से टूट जाता है, क्योंकि उसे संभलना सिखाया ही नहीं गया।
5- परिवार में संवाद की कमी
आज माता-पिता कहते हैं -
- “हमने सब दिया, फिर भी बच्चा भटक गया।”
- लेकिन कई बार सुना नहीं गया।
डाँट मिली, तुलना मिली, अपेक्षाएँ मिलीं -
- पर समझ नहीं मिली।
और इसी कारण
- युवा जब घर में नहीं बोल पाता,
- तो बाहर गलत जगह बोलने लगता है।
माता-पिता और बच्चे के इसी संबंध को हमने एक अलग लेख मे विस्तार से लिखा है यदि आप इस विषय को गहराई से पढ़ना चाहते हैं तो पढ़े- माता-पिता हमेशा सही होते हैं और बच्चे हमेशा गलत?
6- धर्म से डराया गया, समझाया नहीं गया
धर्म को या तो-
- अंधविश्वास बना दिया गया
- या मज़ाक
- युवाओं को यह नहीं बताया गया कि
धर्म मतलब-
- संतुलन, विवेक, आत्मबल, और जीवन की समझ
- जब जड़ें कट जाती हैं, तो पेड़ भटक ही जाता है।
7- तुरंत सब चाहिए, धैर्य नहीं
आज का युग है-
- तुरंत सफलता
- तुरंत पैसा
- तुरंत सुख
- पर जीवन धीरे-धीरे पकता है।
धैर्य न होने से युवा शॉर्टकट, नशा, गलत संगत की ओर फिसल जाता है।
तो समाधान क्या है?
तुलना नहीं, स्वीकृति चाहिए
डर नहीं, संवाद चाहिए
धर्म का डर नहीं, धर्म की समझ चाहिए
अंत में एक सच्ची बात
वह बस सही दिशा की तलाश में है।
अगर उसे सही हाथ मिल जाए,
तो वही युवा समाज का सबसे मजबूत स्तंभ बन सकता है।
क्योंकि
वह बस थकी हुई, उलझी हुई और रास्ता खोजती हुई पीढ़ी है।
अगर उसे सही मार्गदर्शन मिले,
समझने वाला कोई हो,
और जीवन को देखने की सही दृष्टि दी जाए-
तो यही युवा सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है।
याद रखिए -
समस्या वह दिशा है जो हमने उसे दिखाई या नहीं दिखाई।
अब भी समय है,
- सवाल पूछने का,
- संवाद करने का
- और युवाओं को दोष देने के बजाय
- उन्हें समझने का।
आइए हम सब मिलकर यह स्वीकार करें कि
युवा पीढ़ी को सुधारने से पहले हमें अपनी सोच सुधारनी होगी।- घर में संवाद बढ़ाएँ,
- समाज में आदर्श स्थापित करें,
- और जीवन में मूल्यों को केवल बोलें नहीं,
- जीकर दिखाएँ।
FAQs
युवा पीढ़ी गुमराह क्यों हो रही है?
युवा पीढ़ी इसलिए गुमराह हो रही है क्योंकि उसे जीवन की दिशा नहीं मिल पा रही। सोशल मीडिया की तुलना, दिखावटी सफलता और संवाद की कमी ने भ्रम बढ़ा दिया है।
क्या सोशल मीडिया युवाओं को भटका रहा है?
हाँ, अगर उसका उपयोग समझदारी से न हो। सोशल मीडिया पर दिखाया गया जीवन अधूरा और सजाया हुआ होता है, जिससे युवा खुद को कम समझने लगता है।
युवाओं को सही दिशा कैसे दी जा सकती है?
सही संवाद, मूल्य-आधारित शिक्षा, धैर्य की सीख और जीवन को समझाने वाला मार्गदर्शन देकर युवाओं को फिर से सही दिशा दी जा सकती है।
आज की युवा पीढ़ी को क्या समस्या है?
आज की युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्या दिशा का अभाव है। अवसर बहुत हैं, लेकिन स्पष्ट मार्गदर्शन कम है। सोशल मीडिया की तुलना, करियर का दबाव, पारिवारिक संवाद की कमी और दिखावटी सफलता की दौड़ ने युवाओं को भीतर से उलझन में डाल दिया है। समस्या उनकी क्षमता में नहीं, बल्कि स्थिर मार्गदर्शन की कमी में है।
युवा पीढ़ी किसका प्रतीक है?
युवा पीढ़ी ऊर्जा, परिवर्तन और संभावनाओं का प्रतीक है। हर समाज का भविष्य युवाओं के विचारों और कर्मों पर टिका होता है। वे केवल उम्र का वर्ग नहीं हैं, बल्कि नई सोच, नई दिशा और बदलाव की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। सही दिशा मिले तो वही युवा समाज को आगे ले जाते हैं।
युवा वर्ग के ड्रग्स या नशा करने का क्या कारण है?
नशे की ओर झुकाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं — मानसिक तनाव, अकेलापन, गलत संगति, असफलता का डर या जीवन में उद्देश्य की कमी। कई बार युवा अस्थायी राहत की तलाश में गलत रास्ता चुन लेते हैं। संवाद, भावनात्मक सहारा और सकारात्मक वातावरण इस समस्या को कम कर सकते हैं।
आज के युवाओं को गुमराह करना आसान क्यों है?
आज सूचना की भरमार है, लेकिन विवेक की कमी है। सोशल मीडिया, ट्रेंड और बाहरी चमक युवाओं को जल्दी प्रभावित कर देते हैं। जब पहचान और उद्देश्य स्पष्ट नहीं होते, तब व्यक्ति बाहरी प्रभावों में जल्दी बह जाता है। इसलिए दिशा और मूल्य आधारित सोच बेहद आवश्यक है।
बुजुर्ग लोग आज के युवाओं के बारे में सबसे ज्यादा क्या गलत समझते हैं?
कई बुजुर्ग यह मान लेते हैं कि आज के युवा असंस्कारी या जिम्मेदार नहीं हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे अलग परिस्थितियों में बड़े हो रहे हैं। उनकी चुनौतियाँ भी अलग हैं। पीढ़ियों के बीच संवाद की कमी गलतफहमियाँ बढ़ा देती है। समझ और बातचीत से यह दूरी कम की जा सकती है।
आशा है आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी होगी।
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इसी के साथ हम आपसे विदा लेते हैं और भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं कि वे आपके जीवन में सुख, शांति और सदैव प्रसन्नता बनाए रखें।
हर हर महादेव🙏

