क्या आप अपने दिन की शुरुआत भगवान शिव के स्मरण से करना चाहते हैं? आदि शंकराचार्य द्वारा रचित "शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र" का नियमित पाठ मन को शांति, आत्मविश्वास और भगवान शिव की कृपा प्रदान करने वाला माना गया है।
हर हर महादेव प्रिय पाठकों🙏
कैसे हैं आप? आशा करते हैं कि आप ठीक होंगे।
दोस्तों! हिंदू धर्म में प्रातःकाल को अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि सुबह उठते ही जिस देवता का स्मरण किया जाता है, उसका प्रभाव पूरे दिन बना रहता है। भगवान शिव को कल्याणकारी, भोलेनाथ और संसार के दुखों का हरण करने वाला कहा गया है। इसलिए प्रातःकाल उनका स्मरण करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
श्री शिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक सुंदर स्तोत्र है। इस स्तोत्र में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का स्मरण किया गया है। श्रद्धा से इसका पाठ करने वाला व्यक्ति मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त कर सकता है।
।। श्री शिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् ।।
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| श्री शिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् |
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।
खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥१॥
प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं
सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् ।
विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥२॥
प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं
वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम् ।
नामादिभेदरहितं षड्भावशून्यं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥३॥
प्रातः समुत्थाय शिवं विचिन्त्य श्लोकत्रयं येSनुदिनं पठन्ति ।
ते दुःखजातं बहुजन्मसंचितं हित्वा पदं यान्ति तदेव शम्भो: ॥
शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र का सरल हिंदी अर्थ
प्रथम श्लोक का अर्थ
मैं प्रातःकाल भगवान शिव का स्मरण करता हूँ जो संसार के भय को दूर करने वाले हैं, देवताओं के स्वामी हैं, जिनके मस्तक पर गंगा विराजमान हैं, जिनका वाहन नंदी बैल है और जो माता पार्वती के स्वामी हैं। उनके हाथों में त्रिशूल है तथा वे भक्तों को वरदान और अभय प्रदान करते हैं। वे संसार रूपी रोग का अद्वितीय औषध हैं।
द्वितीय श्लोक का अर्थ
मैं प्रातःकाल उस भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ जो कैलाश पर्वत के स्वामी हैं, जिनके शरीर का आधा भाग माता पार्वती का है। वे सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार के कारण हैं। वे समस्त विश्व के स्वामी हैं और संसार रूपी रोग को दूर करने वाले अद्वितीय औषध हैं।
तृतीय श्लोक का अर्थ
मैं उस एकमात्र, अनादि, अनंत और परम शिव की उपासना करता हूँ जिन्हें वेदांत द्वारा जाना जा सकता है। वे पापरहित, महान पुरुष और सभी नाम-रूपों से परे हैं। वे जन्म, वृद्धि और नाश जैसे सभी परिवर्तनों से रहित हैं तथा संसार के दुखों का नाश करने वाले हैं।
शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र के पाठ से मिलने वाले लाभ
1. मन को शांति प्राप्त होती है
सुबह भगवान शिव का स्मरण करने से मन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है।
2. भय और चिंता कम होती है
स्तोत्र में शिव को भवभीतिहर अर्थात भय को दूर करने वाला कहा गया है। नियमित पाठ आत्मबल बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
3. आध्यात्मिक उन्नति होती है
भगवान शिव का स्मरण व्यक्ति को भक्ति और आत्मचिंतन के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।
4. दिन शुभ बनता है
कई भक्तों का अनुभव है कि सुबह शिव स्मरण करने से दिन भर मन प्रसन्न और स्थिर रहता है।
5. शिव कृपा प्राप्त होती है
श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र का पाठ कब करें?
इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या स्नान के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो सुबह किसी भी शांत समय में श्रद्धापूर्वक इसका पाठ किया जा सकता है।
क्या स्त्री और पुरुष दोनों इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, यह स्तोत्र सभी के लिए है। स्त्री, पुरुष, युवा, वृद्ध या विद्यार्थी—कोई भी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकता है।
सार
श्री शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र केवल कुछ श्लोकों का संग्रह नहीं है, बल्कि भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने का एक सुंदर माध्यम है। यदि आप प्रतिदिन कुछ मिनट निकालकर इसका पाठ करते हैं, तो यह आपके दिन की शुरुआत सकारात्मकता, शांति और भक्ति के साथ करने में सहायता कर सकता है।
FAQs
शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र की रचना किसने की?
परंपरागत रूप से इसे आदि शंकराचार्य से संबंधित माना जाता है, हालांकि विभिन्न संस्करणों में मतभेद भी मिलते हैं।
शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
प्रतिदिन एक बार श्रद्धा से पाठ करना पर्याप्त माना जाता है।
क्या बिना स्नान के इसका पाठ किया जा सकता है?
स्नान के बाद पाठ करना उत्तम माना जाता है, लेकिन श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण हैं।
क्या इस स्तोत्र का पाठ सोमवार को विशेष फल देता है?
हाँ, सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन पाठ करना विशेष शुभ माना जाता है।
क्या विद्यार्थी भी इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, विद्यार्थी भी एकाग्रता और मानसिक शांति के लिए इसका पाठ कर सकते हैं।
आपकी राय
क्या आपने कभी श्री शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र का पाठ किया है? पाठ के दौरान आपको कैसा अनुभव हुआ? अपनी अनुभूति और विचार हमें कमेंट में अवश्य बताइए।
तो प्रिय पाठकों,
कैसी लगी आपको स्तुति । आशा करते हैं कि अच्छी-लगी होगी । इसी के साथ विदा लेते हैं। अगली पोस्ट के साथ विश्वज्ञान मे फिर से मुलाकात होगी। तब तक के लिय आप अपना ख्याल रखें, हंसते रहिए, मुस्कराते रहिए और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहिए।
धन्यवाद ,हर हर महादेव🙏

