बंदर और मगरमच्छ की कहानी से क्या सीख मिलती है?
(पंचतंत्र की कहानी और आज के जीवन का सच)
बंदर और मगरमच्छ की संक्षिप्त कहानी
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| बंदर और मगरमच्छ पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी – बुद्धि बल से बडी होती हैं |
एक नदी के किनारे एक पेड़ पर बंदर रहता था।
वह उसी पेड़ के फल खाकर खुश रहता था।
नदी में एक मगरमच्छ रहता था।
धीरे-धीरे बंदर और मगरमच्छ में मित्रता हो गई।
बंदर रोज़ मगरमच्छ को फल खिलाता था।
लेकिन मगरमच्छ की पत्नी को यह पसंद नहीं आया।
उसने कहा -
- “मुझे बंदर का हृदय खाना है।”
मगरमच्छ दुविधा में पड़ गया।
अब तो वो मित्रता और पत्नी के बीच फँस गया।
उसने अपनी पत्नि की इच्छा स्वीकार करते हुए -
बंदर को धोखे से अपने घर ले जाने का निश्चय किया।
लेकिन
नदी के बीच पहुँचकर उसने सच्चाई बता दी।
बंदर की बुद्धि और संकट से बाहर निकलना
बंदर घबराया नहीं। उसने शांति से कहा -
- “मित्र, मेरा हृदय तो पेड़ पर ही रह गया है।
- पहले वहाँ चलो, फिर ले लेना।”
मगरमच्छ उसकी बातों में आ गया
और वापस पेड़ के पास ले आया।
जैसे ही
बंदर पेड़ पर चढ़ा,
उसने मगरमच्छ से मित्रता तोड़ दी
और अपनी जान बचा ली।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
1- स्वार्थी मित्रता ज़्यादा देर नहीं चलती
- जहाँ दोस्ती फायदे पर टिकी हो,
- वहाँ धोखा तय होता है।
आज के समय में भी-
- पैसे
- पद
- काम निकलने तक की ही दोस्ती होती है
यह कहानी हमें सावधान करती है।
2- संकट में घबराना नहीं, सोचना ज़रूरी है
बंदर शारीरिक रूप से कमजोर था,
लेकिन उसकी बुद्धि मजबूत थी।
जीवन में भी:
- डर हमें डुबो देता है
- सोच हमें बचा लेती है
3- हर मीठी बात करने वाला मित्र नहीं होता
मगरमच्छ दोस्त था,
लेकिन अंदर से उसका उद्देश्य गलत था।
आज के समय में:
- मीठी बातें
- झूठी सहानुभूति
- नकली अपनापन
- सब पर आँख बंद कर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
आज के जीवन में यह कहानी कैसे लागू होती है?
आज बंदर और मगरमच्छ:
- ऑफिस
- बिज़नेस
- रिश्तों
- सोशल मीडिया
- हर जगह मिल जाते हैं।
यह कहानी हमें सिखाती है कि-
- भरोसा करें, लेकिन समझदारी के साथ
- भावुक हों, लेकिन अंधे नहीं
- मित्रता रखें, पर आत्मसम्मान न खोएँ
बच्चों के लिए इस कहानी का महत्व
यह कहानी बच्चों को सिखाती है:
- सोचकर निर्णय लेना
- गलत संगति से बचना
- डर के समय बुद्धि का प्रयोग
इसलिए पंचतंत्र की कहानियाँ
आज भी बच्चों के पाठ्यक्रम से बाहर नहीं हुईं।
संक्षिप्त जानकारी
“बंदर और मगरमच्छ” की कहानी हमें यह सिखाती है कि-
- शरीर से नहीं, बुद्धि से जीवन की लड़ाइयाँ जीती जाती हैं।
और यही कारण है कि-
- पंचतंत्र की कहानियाँ
- सैकड़ों साल बाद भी
- हमारे जीवन से जुड़ी हुई लगती हैं।
FAQs
1. बंदर और मगरमच्छ की कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
इस कहानी का मुख्य संदेश है कि -
संकट के समय घबराने के बजाय बुद्धि से काम लेना चाहिए और स्वार्थी मित्रों से सावधान रहना चाहिए।
2. क्या बंदर और मगरमच्छ की कहानी बच्चों के लिए है?
हाँ, यह कहानी बच्चों के लिए भी है,
लेकिन इसके भीतर छुपी सीख बड़ों के जीवन में भी पूरी तरह लागू होती है।
3. पंचतंत्र की कहानियाँ आज भी क्यों प्रासंगिक हैं?
क्योंकि पंचतंत्र की कहानियाँ-
मानव स्वभाव, मित्रता, लालच और बुद्धि पर आधारित हैं,
और ये बातें आज भी नहीं बदली हैं।
4. इस कहानी से हमें रिश्तों के बारे में क्या सीख मिलती है?
यह कहानी सिखाती है कि
- हर मुस्कुराता चेहरा मित्र नहीं होता
- और भरोसा हमेशा समझदारी के साथ करना चाहिए।
5. क्या पंचतंत्र की कहानियाँ जीवन में सच में काम आती हैं?
हाँ, अगर इन्हें केवल कहानी नहीं
बल्कि व्यवहारिक सीख के रूप में समझा जाए,
तो ये जीवन में बहुत मदद करती हैं।
अंत मे
आज की तेज़ और स्वार्थ भरी दुनिया में
“बंदर और मगरमच्छ” की कहानी
हमें रुककर सोचने पर मजबूर करती है।
यह कहानी याद दिलाती है कि-
- शक्ति से नहीं, बुद्धि से
- और भावुकता से नहीं, विवेक से
- जीवन की कठिन परिस्थितियों को पार किया जाता है।
और पढ़े- माता-पिता के लिए 2 नैतिक कहानियाँ – अनमोल सीख
तो प्रिय पाठकों
कैसी लगी आपको ये कहानी ,
यदि आपको यह पंचतंत्र कथा उपयोगी लगी हो,
तो इसे बच्चों और मित्रों के साथ ज़रूर साझा करें।
इसी के साथ विदा लेते हैं,
अगली रोचक कहानी की सीख के साथ फिर मिलेंगे।
आपकी राय और अनुभव
टिप्पणी में अवश्य लिखें-
क्योंकि आपकी सोच ही
इस कहानी को और जीवंत बनाती है।
धन्यवाद 🙏
हंसते रहें, सीखते रहें।

