द्वारिका का डूबना – पुराणों का वर्णन और विज्ञान की खोज
(क्या श्रीकृष्ण की नगरी सच में समुद्र में समा गई?)
द्वारिका का डूबना केवल एक पौराणिक कथा नहीं है। भागवत पुराण और महाभारत में वर्णित इस घटना को आधुनिक विज्ञान भी समुद्र के नीचे मिले प्राचीन अवशेषों के माध्यम से समझने का प्रयास कर रहा है। यह लेख पुराणों और वैज्ञानिक खोजों के आधार पर द्वारिका के डूबने का पूरा रहस्य सरल भाषा में स्पष्ट करता है।
जय श्री कृष्ण प्रिय पाठकों,
आशा करते हैं कि आप स्वस्थ, सुरक्षित और प्रसन्नचित होंगे ।
मित्रों!
जब भी भगवान श्रीकृष्ण का नाम आता है, तो केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक संपूर्ण युग हमारे सामने जीवित हो उठता है।
और उस युग की सबसे भव्य पहचान थी - द्वारिका नगरी।
सोने जैसी चमकती नगरी, समुद्र के किनारे बसी, जहां स्वयं श्रीकृष्ण रहते थे।
पर आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है —
क्या द्वारिका सच में समुद्र में डूब गई?
अगर हाँ, तो क्यों डूबी?
पुराण क्या कहते हैं?
और विज्ञान को समुद्र के भीतर क्या मिला?
इस लेख में हम आपकी हर शंका का उत्तर देंगे -
बिना कठिन शब्दों के,
श्रद्धा और तर्क दोनों को साथ लेकर।
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| पुराणों और विज्ञान में वर्णित समुद्र में डूबी द्वारिका |
द्वारिका नगरी क्या थी?
द्वारिका केवल एक शहर नहीं थी।
वह धर्म, नीति, वैभव और सुरक्षा का प्रतीक थी।
पुराणों के अनुसार:
द्वारिका का निर्माण विश्वकर्मा ने किया था
यह नगरी समुद्र के भीतर से उठाकर बसाई गई थी
चारों ओर समुद्र, ऊँचे प्रासाद, स्वर्ण द्वार
कोई शत्रु वहाँ सरलता से पहुँच नहीं सकता था
भागवत पुराण में द्वारिका को “देवताओं से भी सुंदर नगरी” कहा गया है।
पुराणों में द्वारिका के डूबने का वर्णन
भागवत पुराण क्या कहता है?
भागवत पुराण के अनुसार-
- श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद
- समुद्र ने द्वारिका को धीरे-धीरे अपने भीतर समा लिया।
- कोई अचानक प्रलय नहीं, कोई चीख-पुकार नहीं,
- बल्कि शांत विलय।
- यह संकेत था द्वापर युग का पूर्ण अंत।
महाभारत का संकेत
महाभारत में स्पष्ट लिखा है कि:
- मौसल युद्ध के बाद
- यदुवंश नष्ट हो गया
- द्वारिका खाली हो गई
- जब रहने वाला कोई नहीं बचा,
- तो नगरी का उद्देश्य भी समाप्त हो गया।
मौसल युद्ध और यदुवंश के अंत की पूरी कथा यहाँ पढ़ें-श्रीकृष्ण की मृत्यु का रहस्य, मुसल युद्ध और यदुवंश का अंत
द्वारिका क्यों डूबी? (मुख्य कारण)
यह प्रश्न सबसे अधिक पूछा जाता है।
इसके तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं:
यदुवंश का अंत
द्वारिका यदुवंशियों की नगरी थी।
मौसल युद्ध में यदुवंश का नाश हो गया।
जब धर्म की रक्षा करने वाला वंश समाप्त हुआ,
तो नगरी का रहना भी आवश्यक नहीं था।
श्रीकृष्ण की लीला का समापन
श्रीकृष्ण केवल राजा नहीं थे,
वे युग परिवर्तन के साक्षी थे।
उनके प्रस्थान का अर्थ था -
- द्वापर युग का अंत
- कलियुग का आरंभ
द्वारिका का डूबना प्राकृतिक घटना से अधिक, एक दैवी संकेत था।
श्राप और समय की भूमिका
कुछ ग्रंथों में बताया गया है कि-
यदुवंश को ऋषियों का श्राप मिला
समय के आगे कोई भी नहीं टिक सकता
यह सब मिलकर द्वारिका के विलय का कारण बने।
द्वारिका कैसे डूबी? (अचानक या धीरे-धीरे?)
पुराण स्पष्ट कहते हैं कि द्वारिका अचानक नहीं डूबी।
- समुद्र धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
- लोग पहले ही नगरी छोड़ चुके थे।
- यह डूबना:
- शांत था
- पीड़ारहित था
- और प्राकृतिक प्रतीत होता था
विज्ञान द्वारिका के बारे में क्या कहता है?
अब आते हैं उस प्रश्न पर,
जो आधुनिक मन सबसे अधिक पूछता है -
क्या विज्ञान को द्वारिका के प्रमाण मिले हैं?
तो इसका उत्तर है - हाँ, कुछ संकेत मिले हैं।
समुद्र में क्या मिला?
भारत के समुद्री पुरातत्व विभाग और वैज्ञानिकों ने:
- गुजरात तट के पास
- समुद्र के नीचे
- दीवारों, पत्थरों और संरचनाओं के अवशेष पाए
ये अवशेष बताते हैं कि- यहाँ कभी एक व्यवस्थित नगर था
क्या यह वही द्वारिका है?
विज्ञान यह नहीं कहता कि यह 100% वही द्वारिका है
लेकिन यह ज़रूर मानता है कि:
- यहाँ प्राचीन सभ्यता थी
- समुद्र के बढ़ने से वह डूब गई
- यही बात पुराण भी कहते हैं।
विज्ञान और पुराण - टकराव या संवाद?
यहाँ एक बहुत सुंदर बात समझने योग्य है।
- पुराण कहते हैं - क्यों डूबी
- विज्ञान खोजता है - कैसे डूबी
दोनों का उद्देश्य अलग है,
- पर निष्कर्ष एक ही दिशा में जाता है।
- श्रद्धा अर्थ खोजती है,
- विज्ञान प्रमाण।
क्या द्वारिका फिर कभी प्रकट होगी?
कुछ लोग पूछते हैं कि-क्या द्वारिका फिर उभरेगी?
पुराणों में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।
पर द्वारिका का अर्थ केवल पत्थर नहीं था।
द्वारिका का अर्थ था -
- धर्म
- नीति
- संतुलन
- और जिम्मेदारी
- जब ये मूल्य लौटेंगे,
- तब द्वारिका चेतना के रूप में प्रकट होगी।
द्वारिका से हमें क्या सीख मिलती है?
द्वारिका हमें सिखाती है:
- कोई भी वैभव स्थायी नहीं
- समय सबसे शक्तिशाली है
- धर्म के बिना शक्ति व्यर्थ है
- और जब युग बदलता है,
- तो प्रतीक भी बदल जाते हैं
सारांश
द्वारिका का डूबना केवल एक शहर का डूबना नहीं था।
- वह एक युग का शांत विदा लेना था।
- न कोई शोर,
- न कोई विनाश,
- बस समय की स्वीकृति।
आज भी समुद्र की लहरों के नीचे यदि द्वारिका सोई है तो वह हमें यही याद दिलाती है -
- “जो आया है, उसे जाना ही है।
- पर धर्म और स्मृति सदा जीवित रहते हैं।”
क्या आज भी भगवान श्रीकृष्ण के वंशज मौजूद हैं? जानने के लिए पढ़े-क्या कृष्ण के वंशज आज भी हैं?
FAQs
क्या द्वारिका सच में समुद्र में डूब गई थी?
हाँ, भागवत पुराण और महाभारत में द्वारिका के समुद्र में विलीन होने का स्पष्ट वर्णन मिलता है। विज्ञान भी समुद्र के नीचे प्राचीन अवशेष मिलने की पुष्टि करता है।
द्वारिका कब डूबी थी?
पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद, द्वापर युग के अंत में द्वारिका समुद्र में समा गई।
क्या समुद्र के नीचे द्वारिका के प्रमाण मिले हैं?
हाँ, गुजरात तट के पास समुद्र में पत्थरों की दीवारें, संरचनाएँ और नगर जैसे संकेत मिले हैं, जिन्हें प्राचीन सभ्यता से जोड़ा जाता है।
क्या विज्ञान द्वारिका को स्वीकार करता है?
विज्ञान यह स्वीकार करता है कि वहाँ प्राचीन नगर था, लेकिन उसे सीधे श्रीकृष्ण की द्वारिका घोषित करने में सावधानी बरतता है।
द्वारिका अचानक डूबी या धीरे-धीरे?
पुराणों के अनुसार द्वारिका धीरे-धीरे समुद्र में समाई, कोई अचानक प्रलय नहीं हुआ।
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धन्यवाद ,हर हर महादेव 🙏
जय श्री कृष्ण 🙏

