क्या आप जानते हैं कि माँ लक्ष्मी हर घर में नहीं रहतीं? महाभारत में स्वयं लक्ष्मीजी ने बताया है कि वे किन लोगों के घर निवास करती हैं और किनका त्याग कर देती हैं। यह कथा हर गृहस्थ को अवश्य जाननी चाहिए।
भगवान श्रीहरि विष्णु और माँ महालक्ष्मी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
धन, वैभव और समृद्धि की इच्छा हर व्यक्ति करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माँ लक्ष्मी हर घर में क्यों नहीं रहतीं? आखिर वे किन लोगों के घर निवास करना पसंद करती हैं और किन लोगों का साथ छोड़ देती हैं?
महाभारत में वर्णित एक अत्यंत प्रेरणादायक प्रसंग में स्वयं माँ लक्ष्मी ने देवराज इन्द्र को बताया है कि वे किन गुणों से प्रसन्न होती हैं और किन दोषों के कारण किसी स्थान का त्याग कर देती हैं। यह कथा केवल धन प्राप्ति का संदेश नहीं देती, बल्कि एक आदर्श और धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है।
इस लेख में हम जानेंगे कि माँ लक्ष्मी का वास्तविक निवास कहाँ है, वे किस घर में वास करती हैं, किन लोगों से दूर चली जाती हैं, तथा कौन-से सद्गुण उनके स्थायी निवास का कारण बनते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में भी सुख, शांति, समृद्धि और माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, तो इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।
इस पोस्ट में आप पाएंगे-
- माँ लक्ष्मीजी का निवास
- माँ लक्ष्मी बिना कुछ भी संभव नहीं
- माँ लक्ष्मी जी का प्रिय स्थान
- माँ लक्ष्मीजी की कथा
- हमारा उद्देश्य
लक्ष्मी जी कहाँ रहती हैं?
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| लक्ष्मी जी कहाँ निवास करती हैं? |
माँ लक्ष्मी बिना कुछ भी संभव नहीं
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| लक्ष्मी जी कहाँ निवास करती हैं? |
माँ लक्ष्मी जी का प्रिय स्थान
दोस्तों माँ उस जगह रहना बहुत पसंद करती है जहाँ लोगों में सदभाव हो ,प्यार हो ,शान्ति हो ,क्लेश न हो ,जिस घर में लोग एक -दुसरे का मान -सम्मान करते हो ,अच्छे वचन बोलते हो , घर में आये अतिथि का सत्कार करते हो। उन्हें देखकर ऊबते न हो।
प्रिय पाठकों !आइये इस कहानी के जरिए माँ की मन की बातों को और अच्छे से जाने
माँ लक्ष्मीजी की कथा
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| लक्ष्मी जी कहाँ निवास करती हैं? |
ये देखकर इंद्र को बड़ी हैरानी हुई। उन्होंने राजा बलि से पुछा - की हे दानवराज !तुम्हारे शरीर से यह कौन स्त्री बाहर निकली है? इतनी सुंदर ,तेजपुंज यह स्त्री कौन है ? ये कोई देवी है या कोई आसुरी या फिर कोई मानुषी कौन है ये ?
तब राजा बलि ने कहा की --- देवराज इंद्र न तो ये कोई देवी है ,न कोई मानुषी और न ही कोई आसुरी। ये कौन है ,क्या है -ये तुम इसी से पूछो। राजा बलि की बात मानकर इंद्र ने उस स्त्री से पुछा की ---- हे देवी !तुम कौन हो और असुरराज बलि को छोड़कर मेरी और क्यों आ रही हो ?
इस पर उस दिव्य शक्ति ने उत्तर दिया कि -- देवेंद्र ! मुझे न तो विरोचन (बलि के पिता जी ) जानते थे और न ये उनके पुत्र बलि ही जानते है। पंडित लोग मुझे विधित्सा ,दुस्सहा ,भ्रति ,श्री और लक्ष्मी के नामो से पुकारते है। तुम और बाकी दुसरे देवता भी मुझे इसी नाम से जानते है।
इस पर इंद्र ने पुछा की --- हे देवी ! आप इतने दिनों तक राजा बलि के पास रहीं और अब मेरे पास आ रही हो। आखिर ऐसा कौन सा दोष आपने इनमे देखा और मुझमे ऐसा क्या गुण देख लिया जो आपने अपना रुख बदल लिया।
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| लक्ष्मी जी कहाँ निवास करती हैं? |
इंद्र ने फिर पुछा --हे देवी !आप अब असुरों के पास क्यों नहीं रहना चाहती ?
लक्ष्मी जी बोली -- जहाँ सत्य ,दान ,व्रत ,तप ,पराक्रम तथा धर्म रहते है ,,मैं वहीं रहती हूँ। और ये असुर इस समय इन सब से विमुख है। पहले ये सत्यवादी थे। ब्राह्मणों तथा जितेन्द्रियों के हितेषी थे।
पर अब ये सिर्फ ब्राह्मणों से नफरत ही नहीं बल्कि अब ये झूठे हाथ घी छूते है ,अभक्ष्य भोजन करते है और धर्म की मर्यादा तोड़कर मनचाहा आचरण करते है। पहले ये उपवास करते थे ,तप और धर्म आदि के कार्य करते रहते थे।
हर रोज सूर्य के उगने से पहले उठ जाते थे और रात के आधे भाग में ही सोते थे। दिन में तो ये कभी भी सोने का नाम नहीं लेते थे। दीन ,अनाथ ,दुर्बल ,वृद्ध ,रोगी तथा स्त्रियों पर दया करते थे।
इतना ही नहीं उनके लिए अन्न ,जल तथा वस्त्रो की व्यवस्था करते थे। जो जीवन से बिलकुल हताश हो चुके थे --उन रोगी ,दुर्बल ,पीड़ित ,भयभीत व व्याकुल लोगो को ढाढ़स बंधाते थे और उनकी सहायता करते थे।
ये अच्छा खाना बनाकर अकेले ही नहीं खाते थे बल्कि पहले अन्य को खिलाकर बाद में खुद खाते थे। हमेशा सब लोगो को एक समान समझकर उन पर दया करते थे। चतुरता ,सरलता ,उत्साह ,निरहंकारता ,सौहार्द ,क्षमा ,सत्य ,दान ,तप ,पवित्रता ,दया ,कोमल वाणी और मित्रों से अटूट प्रेम --ये सभी गुण इनमे मौजूद थे।
निद्रा ,आलस्य ,दोषदृष्टि ,अविवेक ,अप्रसन्नता ,असंतोष और कामना --ये अवगुण इन्हे छूते तक नहीं थे। पर अब इनकी सारी बाते ही निराली और विपरीत ही दिखाई पड़ती है। धर्म तो इनमे अब रहा ही नहीं और हमेशा काम -क्रोध के वशीभूत रहते है।
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बड़े -बूढ़ो की सभाओ में ये गुणहीन असुर उनमे दोष निकालते और उनकी हंसी उड़ाते रहते है। वृद्धों के आने पर ये लोग अपने आसन पर ही बैठे रहते है ,उठते भी नहीं। स्त्री पति की और पुत्र पिता की आज्ञा नहीं मानता। माता -पिता ,वृद्ध ,आचार्य ,अतिथि और गुरुओं का आदर इनमे से बिलकुल उठ गया है।
सन्तानो के उचित लालन -पोषण में ध्यान नहीं देते। इनकी रसोइया भी अब पवित्र नहीं रहती। छोटे बालक आशा लगाकर टकटकी बांधे देखते ही रह जाते है। और ये दैत्य लोग खाने की वस्तुएं अकेले ही चट कर जाते है। ये पशुओ को पाल तो लेते है पर उन्हें चारा ,पानी नहीं देते हर दिन इनके घर में क्लेश रहता है।
अब इनके घर वर्णशंकर संताने पैदा होने लगी है। वेदवेत्ता ब्राह्मणो और मूर्खो को ये एक समान आदर या उनका अनादर करते है।ये अपने पूर्वजों द्वारा ब्राह्मणों की दी हुई जागीरें नास्तिकता के कारण छीन लेते है।
शिष्य अब गुरुओं से सेवा करवाते है। पत्नी पति पर शासन करती है और उनका नाम ले -लेकर पुकारती है। ये सब के सब पापाचारी , नास्तिक और स्वैरी बन गए है। अब इनके बदन पर पहले जैसा तेज नहीं रह गया।
हे देवराज ! इसलिए अब मैंने ये निश्चय कर लिया है की ,मैं अब इनके घर में नहीं रहूंगी। इसी कारण से मैं दैत्यों को छोड़कर तुम्हारी और आ रही हूँ। तुम मुझे स्वीकार करो।
जहां मैं रहूँगी वहां आशा ,श्रद्धा ,धृति ,क्षान्ति ,विजिति ,संतति,क्षमा और जया -ये आठों देवियाँ मेरे साथ निवास करेंगी। मेरे साथ ही ये सभी देवियां भी असुरों का त्याग कर आ गयी है। तुम देवताओ का मन अब धर्म में लग गया है ,इसलिए अब हम सब तुम्हारे यहां ही निवास करेंगी।
तब इंद्र ने उन लक्ष्मी जी का अभिनंदन किया। सारे देवता भी उनका दर्शन करने के लिए वहां आ गए। दर्शन करने के बाद सभी देवता वापस स्वर्ग को लौट गये। स्वर्ग पहुंचने के बाद नारदजी ने बाकी सभी देवताओं को जो दर्शन करने नहीं जा सके थे,
उन्हें लक्ष्मी जी के आगमन की सारी बातें बताई। बताते समय उनके मन में अपार ख़ुशी ,भक्ति व प्रेम भरा था। तभी सभी ने एक साथ बाजे -गाजे बजाए व पुष्पों की ,अमृत की वर्षा की। तब फिर से सारा संसार सुखी तथा धर्ममय हो गया।
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FAQs
1. लक्ष्मी जी किस घर में निवास करती हैं?
शास्त्रों के अनुसार माँ लक्ष्मी ऐसे घर में निवास करती हैं जहाँ सत्य, धर्म, दान, स्वच्छता, प्रेम, शांति, अतिथि-सत्कार, बड़ों का सम्मान और मधुर वाणी का वातावरण हो। जिस परिवार में आपसी सद्भाव और ईश्वर के प्रति श्रद्धा होती है, वहाँ माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
2. माँ लक्ष्मी किन लोगों का त्याग करती हैं?
माँ लक्ष्मी उन लोगों का त्याग करती हैं जो झूठ, अधर्म, अहंकार, क्रोध, आलस्य, अपवित्रता, कलह, माता-पिता और गुरु का अनादर तथा दूसरों के प्रति अन्यायपूर्ण व्यवहार करते हैं। ऐसी प्रवृत्तियाँ लक्ष्मी कृपा में बाधा मानी गई हैं।
3. क्या केवल धनवान व्यक्ति पर ही माँ लक्ष्मी की कृपा होती है?
नहीं। माँ लक्ष्मी की कृपा केवल धन से नहीं आँकी जाती। वे सदाचारी, परिश्रमी, दानी, धर्मनिष्ठ और विनम्र लोगों पर भी प्रसन्न होती हैं। वास्तविक लक्ष्मी केवल धन ही नहीं, बल्कि सुख, शांति, समृद्धि और सम्मान का भी प्रतीक है।
4. माँ लक्ष्मी का मुख्य निवास कहाँ माना जाता है?
शास्त्रों के अनुसार माँ लक्ष्मी का मुख्य निवास भगवान विष्णु के चरणों में क्षीरसागर में माना गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें कमल पर विराजमान तथा पाताल में भी स्थित बताया गया है। पृथ्वी पर वे सद्गुणों से युक्त घरों में निवास करना पसंद करती हैं।
5. यह कथा किस ग्रंथ में वर्णित है?
यह प्रसंग महाभारत के शान्ति पर्व में मिलता है। इसमें राजा बलि, देवराज इन्द्र और माँ लक्ष्मी के संवाद के माध्यम से बताया गया है कि लक्ष्मी किन गुणों वाले लोगों के पास रहती हैं और किन दोषों के कारण किसी का साथ छोड़ देती हैं।
आशा है आपको कहानी अच्छी लगी होगी। और माँ के दिल की आवाज़ आप तक पहुंची होगी। अपनी राय प्रकट करें। विश्वज्ञान मे अगली पोस्ट के साथ फिर मुलाकत होगी। तब तक के लिए आप अपना ख्याल रखिए, हंसते रहिए- मुस्कराते रहिए और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहिए।
हर हर महादेव🙏
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