क्यों नहीं मिलता हनुमान चालीसा का फल

VISHVA GYAAN
क्या आप रोज़ हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, फिर भी मनोकामनाएँ पूरी नहीं हो रहीं? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ, जिनकी वजह से हनुमान चालीसा का पूरा फल नहीं मिल पाता? आइए जानिए हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सही तरीका।

क्यों नहीं मिलता हनुमान चालीसा का फल

हनुमान चालीसा का फल न मिलने का मुख्य कारण अक्सर हमारा मन, भाव और ध्यान का अभाव होता है। जब हम जल्दी-जल्दी, बिना श्रद्धा या सिर्फ दिखावे के लिए पाठ करते हैं, तो उसका प्रभाव कम हो जाता है। साथ ही, गलत जीवनशैली, अधीरता और नियमितता की कमी भी कारण बनती है। सच्चा फल तभी मिलता है जब हम पूरे विश्वास, धैर्य और भक्ति के साथ हनुमान जी का स्मरण करते हैं।


हर हर महादेव!प्रिय पाठकों 🙏
कैसे है आप लोग हम आशा करते हैं कि आप ठीक होंगे 


प्रिय पाठकों, आज की इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं हनुमान चालीसा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें। जो हनुमान भक्तों के लिए जानना अति आवश्यक है। 


हनुमान चालीसा अधिकतर लोग पढ़ते हैं, लेकिन पढ़ने का तरीका सही न होने के कारण उनको हनुमान चालीसा का पूरा फल नहीं मिल पाता। आपको आपकी पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके, यही इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य है। इसलिए पोस्ट मे लिखे पॉइंट्स को ठीक से पढ़े। तो चलिए बिना देरी किए पढ़ते हैं आज की पोस्ट। 

हनुमान चालीसा 

हनुमान चालीसा का फल क्यों नहीं मिलता, आशिर्वाद देते हुए हनुमान जी”
भक्ति में ध्यान और विश्वास हो, तभी मिलता है सच्चा फल”

हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम 

1- यदि आप हनुमान चालीसा पढ़ने जा रहे हैं, तो इसे एक साथ पूरा क्रमबद्ध तरीके से पढ़कर ही उस स्थान से उठे यानी जब तक हनुमान चालीसा पूरी न हो जाये, तब तक अपने स्थान से न तो उठना है और न ही रुकना है। 


मित्रों अधिकतर लोग होते हैं,जो हनुमान चालीसा पढ़ते समय या स्तुति करते समय या अन्य पूजा पाठ हवन करते समय किसी के फोन आने पर या अन्य किसी और कारण से बीच मे रुक जाते हैं। पहले बात करते हैं फिर बाकी का बचा हुआ पाठ करते हैं। जो कि बिल्कुल गलत है। 


ऐसा नही करना चाहिए। कोशिश करें कि पहले पूजा पूरी करें और बातें बाद में या फिर पहले बाते या अन्य सभी काम पूरे कर लें और उसके बाद ही पूजा की शुरुआत करें। किंतु बीच मे कभी न रुके। इससे किसी भी पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त नही होता। 


जिसमें की हनुमान चालीसा तो अपने आप मे ही एक पावरफुल पाठ है, इसकी महिमा अपार है, इसे साधारण  न समझे। कलयुग से दुष्प्रभावों,मुसीबतों और बीमारियों से बचने का एक मात्र उपाय है हनुमान चालीसा। 


कलयुग के जीते जागते यानी जीवित भगवान हैं श्री हनुमानजी। इसलिए दोस्तों हनुमान चालीसा पूरे श्रद्धा भाव से बिना बीच मे रुके, पूरा पढ़कर ही उठें। जिससे आपको हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो सकें और आपकी मनोकामनाएं भी पूरी हो सकें। 


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2- कभी भी हनुमान चालीसा की चौपाइयों को बीच मे से पढ़ना शूरू न करें। शुरुआत से ही पढ़े, जब भी पढ़े। 


3- मित्रों, जिस चौपाई में लिखा है कि- तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजे नाथ हृदय मह डेरा। यहां तुलसी दास जी की जगह ,आपको आपना नाम लेना चाहिए। 


4- हनुमान चालीसा पढ़ते समय मन मे किसी भी प्रकार की नकारात्मकता को न आने दे। अपनी सोच को सकारात्मक रखें। 


5- हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले श्री गणेश, श्री सीता राम जी का ध्यान जरूर करना चाहिए। इसके अलावा अपने कुल के देवी- देवताओं का भी ध्यान करना चाहिए  और फिर उसके बाद ही हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए। 


6- हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले हनुमान जी के चित्र या उनकी मूर्ति को गंगा जल या गंगा जल न हो तो साधारण शुद्ध जल से पवित्र करें। उन्हें तुलसी की माला या जनेऊ पहनाए और फिर हनुमानजी को उनकी पसंद का भोग लगाये। 


7- हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले चमेली या देशी घी का दीप जरूर जलाये, दीपक की बाती यदि लाल धागे से बनी हो तो अति उत्तम है, अगर लाल धागा न हो तो रुई की बाती का इस्तेमाल करें और साथ ही एक लौटे मे जल भरकर रखें। 


8- हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले उनकी मूर्ति या जो भी आपके पास चित्र है, उस चित्र या मूर्ति को एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें और खुद कुश के आसन पर बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ करें। 


9- परिवार मे जब किसी की मौत हो जाती है तो वहां सूतक काल माना जाता है। जब तक सूतक काल रहता है तब तक हनुमान चालीसा का पाठ न करें और इनके अलावा अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा नही करनी चाहिए। इस दौरान मंदिर मे प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। 


10- कई लोग हनुमान चालीसा का पाठ तब करते हैं जब उनके ऊपर किसी प्रकार का कोई संकट होता है। अच्छी बात है मित्रों, संकट मे यदि अपने इष्ट को याद नही करेंगे तो किसे करेंगे, किसे पुकारेंगे पर दोस्तों आपको नही लगता कि ये गलत है। 


क्या ऐसा नही हो सकता की उन्हें सुख मे भी याद किया जाए। यदि उन्हें सुख मे भी याद करेंगे तो दुख होगा ही क्यों। कहते हैं न- दुःख मे सुमिरन सब करें, सुख मे करे न कोई, सुख मे सुमिरन सब करे, तो दुःख काहे को होए। 


इसलिए मित्रों हनुमान जी को केवल संकट पड़ने पर ही नहीं बल्कि अन्य सुख के दिनों मे भी याद करना चाहिए। ऐसा करने से उन्हें हर्ष की प्राप्ति होती है, उन्हें अच्छा लगता है कि उनके भक्त उन्हें हर परिस्थिति मे याद करते हैं। 


नोट- 

मित्रों! हनुमान चालीसा हो या अन्य कोई भी पूजा, पाठ और स्तुति, इन्हें पढ़ने से पहले मन मे अटूट विश्वास, भरोसा होना बहुत ज़रूरी है।क्योंकि बिना विश्वास के कुछ भी नही है। फिर चाहे आपने कितनी ही शुद्धता और नियमों का पालन क्यों न किया हो। 


इसलिए दोस्तों हनुमान चालीसा या किसी भी स्तुति को पढ़ते समय मन मे पूरी श्रद्धा और विश्वास का होना बहुत जरूरी है। 


हम मनुष्यों का कर्त्तव्य है श्रद्धा भाव से कर्म करना और फल देना भगवान का कर्त्तव्य। वो हमे कैसा फल प्रदान करेंगे, ये उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। पर इतना जरूर है मित्रों की वो जो करेंगे अच्छा ही करेंगे। 


कई बार ऐसा होता है मित्रों, कि हम बड़े प्रेम से, भक्ति भाव और श्रद्धा से पूजा करते हैं और उसका फल हमे विपरित ही मिलता है। जिससे भगवान पर से विश्वास उठ जाता है। जबकि दोस्तों! ऐसा नहीं होना चाहिये क्योंकि भगवान किसी के साथ गलत नही करते। 


हमे लगता जरूर है कि उन्होंने गलत किया है, पर वो  गलत होता नही है। फिर एक समय ऐसा आता है जब आपको खुद लगता है कि हां भगवान ने आपके साथ ठीक किया। 


उदाहरण के लिए 

मान लीजिए कि आपने बेटी की शादी तय की और ठीक शादी वाले दिन लड़का शादी करने के लिए मना कर दे तो ,उस समय आप भगवान को कोसते है कि पता नहीं भगवान ने किस बात की सजा दी है या फिर कहेंगे कि पता नहीं भगवान मेरे साथ ही ऐसा क्यों करते हैं ।


पर वहीं कुछ समय बाद आपको पता चलता है कि जिस लड़के से आपकी बेटी की शादी होने वाली थी, उसकी car accident मे मृत्यु हो गई। और उस वक़्त आप उसी भगवान का शुक्रिया करते हैं और एक-दूसरे से कहते कि हाँ! जो हुआ अच्छा हुआ। भगवान जो करते हैं, वो ठीक ही करते हैं। यदि उस दिन बेटी की शादी हो गई होती तो आज बेटी विधवा होती। 


दोस्तों भगवान की मर्जी का हम इंसानों को कुछ नहीं पता। उनकी माया वो ही जाने, इसलिए बिना किसी शिकायत के जीवन मे जो कुछ भी हो रहा है उसे भगवान का प्रसाद समझ कर स्वीकार करते रहें। इससे आपके जीवन मे सब मंगल ही मंगल होगा। 


इसके अलावा मित्रों एक बात ये भी है कि यदि जीवन मे सुख ही सुख होगा तो दुःख की कल्पना कैसे होगी। कैसे पता चलेगा कि ये दुःख है कि सुख। इसलिए भगवान पर पूरा विश्वास रखते हुए पूजा पाठ करें। ऐसा करने से आपको सफ़लता अवश्य प्राप्त होगी। आपकी पूजा स्वीकार होगी। 


FAQs

1. हनुमान चालीसा का फल क्यों नहीं मिलता?

हनुमान चालीसा का फल न मिलने का मुख्य कारण श्रद्धा, विश्वास, एकाग्रता और नियमितता की कमी हो सकती है। साथ ही, केवल फल की इच्छा से पाठ करना भी भक्ति की भावना को कम कर देता है।


2. क्या हनुमान चालीसा बीच में रोककर पढ़ सकते हैं?

यदि संभव हो, तो हनुमान चालीसा का पाठ एक ही क्रम में पूरा करना बेहतर माना जाता है। बीच में बार-बार रुकने से एकाग्रता भंग होती है।


3. हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले किसका स्मरण करना चाहिए?

परंपरागत रूप से श्री गणेश, श्री सीताराम, अपने इष्टदेव और कुलदेवता का स्मरण करके हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।


4. क्या हनुमान चालीसा केवल संकट के समय ही पढ़नी चाहिए?

नहीं। हनुमान जी का स्मरण केवल संकट में ही नहीं, बल्कि सुख के समय भी करना चाहिए। नियमित भक्ति से मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक बल बढ़ता है।


5. हनुमान चालीसा पढ़ते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?

सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, विश्वास, विनम्रता और एकाग्र मन। बाहरी नियमों के साथ-साथ सच्चा भाव भी आवश्यक माना गया है।


6. क्या हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए दीपक और भोग लगाना आवश्यक है?

दीपक, भोग और पूजन सामग्री श्रद्धा व्यक्त करने के पारंपरिक माध्यम हैं, लेकिन यदि वे उपलब्ध न हों तो भी सच्चे मन और भक्ति से किया गया पाठ स्वीकार्य माना जाता है।


7. क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी मनोकामनाएँ पूरी हो जाती हैं?

हनुमान चालीसा का पाठ आध्यात्मिक शक्ति, साहस, मन की शांति और ईश्वर के प्रति विश्वास बढ़ाने का माध्यम है। मनोकामनाओं की पूर्ति ईश्वर की इच्छा, उचित समय और व्यक्ति के कर्मों पर भी निर्भर मानी जाती है।


8. क्या हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए?

हाँ, यदि संभव हो तो प्रतिदिन श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


आशा करते हैं दोस्तों कि, आपको जानकारी पसंद आई होगी। इसी के साथ विदा लेते हैं। अगली पोस्ट के साथ विश्वज्ञान मे फिर से मुलाकात होगी। तब तक के लिए आप हंसते रहिए,मुस्कराते रहिए और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहिए। 

 

हनुमान चालीसा (हिंदी में ) | Hanuman Chalisa In Hindi  

धन्यवाद, हर हर महादेव 🙏


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